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‘राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं’, एनडीए के और करीब हुए नीतीश !

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‘राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं’, एनडीए के और करीब हुए नीतीश !

राजनीति//Bihar/Patna :

ललन सिंह के इस्तीफे को लेकर उड़ रही अफवाहों को खारिज करने वाले जेडीयू नेताओं ने आखिरकार इस्तीफे की पुष्टि कर दी। नीतीश के बेहद करीबी रहे ललन सिंह को क्यों इस्तीफा देना पड़ा, यह कारण भी अब सार्वजनिक हो गया है। नीतीश की गोद में बैठे ललन सिंह से आखिर नीतीश इतने खफा क्यों हो गए, जो उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा।

आखिरकार राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से विदाई हो ही गई। मीडिया की खबरों को अफवाह और मीडिया वालों को भाजपा के इशारे पर खबर पढ़वाने वाला बता कर न ललन सिंह अपना पद बचा पाए और न नीतीश कुमार ने उन्हें बख्शा। हां, इतना ही नीतीश ने उनके लिए किया कि उन्हें खुद इस्तीफा देने तक इंतजार किया। ललन सिंह को जेडीयू अध्यक्ष पद क्यों छोड़ना पड़ा, इस बारे में अब तक बहुत सारी बातें सामने सियासी गलियारे में पहले ही चर्चा का केंद्र बनती रही हैं, लेकिन सबसे चैंकाने वाली बात यह निकल कर सामने आ रही है कि नीतीश कुमार को ही पटखनी देने की पूरा बंदोबस्त ललन सिंह कर चुके थे।
कमान नीतीश ने हाथ में लिया
बिहार के सियासी गलियारे में अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि नीतीश कुमार का अगला कदम क्या होगा। इस बारे में दो तरह की बातें कही जा रही हैं। पहली बात यह कि नीतीश के पास अब पार्टी के फैसले लेने का संवैधानिक अधिकार है। वे अभी इंडी अलायंस के साथ हैं। एनडीए में उनकी वापसी की अटकलें भी लगती रही हैं। नीतीश कुमार को यह भी पता है कि आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने उन्हें चने की झाड़ पर चढ़ा तो दिया, पर जब साथ देने का समय आया तो चुप्पी साध ली। नीतीश इसके लिए ललन सिंह को भी कम जिम्मेदार नहीं मानते। 
कई मुद्दों पर था नीतीश का मतभेद
नीतीश के करीबी बताते हैं कि इंडी एलायंस में बातचीत के लिए जो कमेटी बनाई गई थी, उसमें ललन सिंह भी शामिल थे। ललन सिंह ने नीतीश का पक्ष मजबूती से नहीं रखा। लालू यादव भी उस वक्त खामोश रहे, जब ममता बनर्जी ने संयोजक पद को गैर जरूरी बताते हुए सीधे पीएम पद के लिए मल्लिकार्जुन खरगे का नाम प्रस्तावित कर दिया। इन दो बातों के अलावा भी ललन सिंह से एक मुद्दे पर नीतीश का मतभेद था, जो उन्हें अध्यक्ष पद से हटाए जाने का कारण बना।
नीतीश की नाराजगी की बड़ी वजह क्या?
एनडीए से जेडीयू के अलग होकर महागठबंधन में शामिल होने की आधार भूमि ललन सिंह ने ही तैयार की थी। जिस समय यह सब हो रहा था, उसी वक्त नीतीश को सीएम पद से बेदखल करने की स्क्रिप्ट भी लिखी जा रही थी। जेडीयू से अलग होकर अपनी पार्टी आरएलजेडी बनाने वाले उपेंद्र कुशवाहा को इसकी भनक लग गई थी। यही वजह थी कि वे बार-बार आरजेडी से हुई डील के बारे में जानकारी मांग रहे थे। 
तेजस्वी को उत्तराधिकारी बनाते ही किनारा
तेजस्वी को जब नीतीश ने अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव उनके ही नेतृत्व में लड़ने की घोषणा की तो कुशवाहा ने जेडीयू से किनारा कर लिया। सच यह है कि ललन सिंह ने आरजेडी से हाथ मिला लिया था। उनकी पहली कोशिश यह थी कि एनडीए से जेडीयू अलग हो जाए। इसमें सीएम की कुर्सी आड़े आ रही थी तो ललन ने फिलहाल इस मुद्दे पर आरजेडी को चुप्पी साध लेने की सलाह दी। अब वे बड़े खेल की तैयारी में जुटे थे।
क्या थी ललन सिंह की योजना
पहले से ही तैयार योजना के तहत पटना में हुई विपक्षी दलों की बैठक में लालू यादव ने राहुल गांधी को दूल्हा और विपक्षी दलों के बाराती बनने की बात कह कर नीतीश के पीएम पद की दावेदारी पर सवाल खड़ा कर दिया। बाद में नीतीश के संयोजक बनने की संभावना पर भी लालू की चुप्पी ने पानी फेर दिया। विपक्षी गठबंधन में अपनी घटती पूछ से नीतीश वैसे ही खफा थे और ललन को मन ही मन कोस रहे थे कि उन्हें गठबंधन में बातचीत के लिए नामित कर उनसे बड़ी भूल हो गई है। 
नीतीश को किनारे करने की पूरी प्लानिंग थी
इस बीच नीतीश के गुप्तचरों ने सनसनीखेज संदेशा नीतीश को दिया। ललन सिंह ने नीतीश को किनारे करने की पूरी प्लानिंग कर ली थी, जो उनके गुप्तचरों ने डिकोड कर दिया। ललन चाहते थे कि जेडीयू का विलय अगर आरजेडी में करने के लिए नीतीश तैयार नहीं होते हैं तो क्यों न जेडीयू को ही तोड़ लिया जाए।
जेडीयू को तोड़ना चाहते थे ललन सिंह?
ललन सिंह और आरजेडी के बीच जो रणनीति बनी थी, उसके मुताबिक जेडीयू को आठ-दस विधायकों को तोड़ने की तैयारी थी। दो दिन पहले पटना में जेडीयू के ऐसे 11 विधायक एक जगह जमा भी हुए थे। बैठक गोपनीय थी, लेकिन मीडिया की नजरों से बच नहीं सकी। तय यह था कि तेजस्वी के विदेश दौरे से लौटने के बाद यानी खरमास बीतते ही जेडीयू के विधायक टूट कर आरजेडी का समर्थन कर दें, ताकि तेजस्वी सीएम बन सकें। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए खुद को व्यस्त रहने की बात कह कर ललन सिंह ने इस्तीफा दिया है। भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक ललन सिंह को लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ना था। उन्हें राज्यसभा के रास्ते आरजेडी ने संसद में भेजने का आश्वासन दिया था।
केसी त्यागी ने दिए बड़े संकेत
जेडीयू के वरिष्ठ नेता और सलाहकार केसी त्यागी का कहना है कि राजनीति में कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। उनके बयान से ही स्पष्ट है कि नीतीश कुमार का अगला कदम क्या होगा। नीतीश अब इंडी अलायंस से अपनी नाराजगी जाहिर कर कद बढ़ाने का दबाव बनाएंगे। अगर बात नहीं बनी तो उनकी राह एनडीए की ओर मुड़ सकती है। नीतीश की बीजेपी में नो एंट्री की रट लगाए बिहार के भाजपा नेता अब नीतीश के खिलाफ जुबान खोलने से परहेज कर रहे हैं। इसका मतलब यही है कि उनको ऊपर से ऐसा न करने का आदेश है। यानी नीतीश एनडीए की ओर भी मुखातिब हो सकते हैं। इन दोनों संभावनाओं में दूसरी संभावना ज्यादा मजबूत दिखती है। केसी त्यागी का बयान तो यही संकेत देता है। बहरहाल खरमास बाद बिहार में कोई बड़ा खेल हो सकता है।

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Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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