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पूर्ण सूर्यग्रहण पर जानवर हो जाते हैं कन्फ्यूज, दुनिया में होते हैं ये हैरान करने वाले असर

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पूर्ण सूर्यग्रहण पर जानवर हो जाते हैं कन्फ्यूज, दुनिया में होते हैं ये हैरान करने वाले असर

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8 अप्रैल, 2024 को इस साल का पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण है। इसका जानवरों पर हैरान करने वाला असर होता है। इतना ही नहीं, मौसम पर भी काफी तेज प्रभाव छूटता है। आइए जानते हैं कि किस तरह के हैरान करने वाले बदलाव होते हैं जानवरों के व्यवहार पर। साथ ही, मौसम में क्या बदल जाता है?

इस साल का पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण 8 अप्रैल को होने वाला है। भारत में दिखेगा नहीं। लेकिन उत्तरी अमेरिका का बहुत बड़ा इलाका इसे देखेगा। जब हमारा चांद पूरी तरह से सूरज को ढंक लेगा। तब दिन में रात हो जाएगी। इसका सबसे तगड़ा और हैरान करने वाला असर जानवरों पर देखने को मिलेगा। क्योंकि वो कन्फ्यूज हो जाएंगे। 
सबसे ज्यादा पक्षी
पक्षी और जानवरों के पास कोई घड़ी नहीं होती। ज्यादातर जानवर दिन की रोशनी और रात के अंधेरे के हिसाब से अपना काम करते हैं। सूरज की रोशनी देख कर उठते हैं। अंधेरा होने पर शिकार करने निकलते हैं। या सोते हैं। लेकिन 8 अप्रैल को जानवर दिन में अंधेरा छाने से परेशान हो जाएंगे। यह निर्भर करता है कि वह जानवर किस प्रजाति का है। ग्रेट अमेरिकन एक्लिप्स के दौरान एक स्टडी की गई थी। इसे कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया था। उन्हें पता चला कि पूर्ण सूर्यग्रहण के समय पक्षी सबसे ज्यादा कन्फ्यूज हो जाते हैं। दिन की रोशनी में बदलाव होते ही उन्हें लगता है कि शाम हो गई। वो बीच में ही अपना काम छोड़कर आराम करने चले जाते हैं। लेकिन जैसे ही अंधेरा छंटता है, वो समझ नहीं पाते कि ये क्या हो रहा है।
मुर्गे और टिड्डों का व्यवहार तेजी से बदलता है
मुर्गों पर इसका असर ज्यादा देखा गया है। अचानक से अंधेरा होने और फिर रोशनी होते ही ये बांग देने लगते हैं। ये खाने की तलाश करने लगते हैं। क्योंकि ज्यादातर मुर्गे सुबह के समय खाते हैं। थोड़ी देर का प्राकृतिक अंधेरा उन्हें ये आभास कराता है कि रात हो गई है। फिर जो रोशनी आती है। उसे सुबह मानकर फिर खाने चले जाते हैं। रात में आवाज करने वाले टिड्डे अचानक से बोलना शुरू कर देते हैं। रोशनी होते ही फिर चुप हो जाते हैं। 
तापमान में तेजी से आती है गिरावट और चढ़ाव
एक ग्रहण के दौरान स्टडी की गई थी कि सूरज की रोशनी ढंकते ही तापमान तेजी से गिरता है। जैसे ही रोशनी वापस आती है, ये फिर तेजी से ऊपर उठता है। कई बार तो तापमान में माइनस छह डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो जाती है। सामान्य तौर पर 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट या तेजी देखी जाती है। 1834 में ग्रहण के समय पेंसिलवेनिया के गेटिसबर्ग में तापमान में माइनस 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट देखी गई थी। 2017 में ग्रहण गर्मियों के समय हुआ था। तब भी लोगों को तापमान में गिरावट महसूस हुई थी। पूरी प्रकृति तापमान का गिरना महसूस करती है। फिर उठने पर वापस जगने लगती है। 
बन सकता है दुर्लभ शैडो स्नेक
पूर्ण सूर्यग्रहण के समय दुर्लभ शैडो स्नेक बनते हैं। यानी रोशनी और अंधेरे के बीच का एक बैंड जो पूरे महाद्वीप या देश के ऊपर देखने को मिलता है। यह पूर्ण सूर्यग्रहण होने से ठीक पहले बनता है। या फिर खत्म होने से ठीक पहले। यह परछाई ऐसे लहराता है जैसे कोई सांप चल रहा हो। 8 अप्रैल को इसके बनने की संभावना कितनी है, फिलहाल ये बता पाना बड़ा मुश्किल है। लेकिन उस दिन हो सकता है कि ये बन ही जाए।
आसमान में दिखने लगते हैं तारे
जैसे ही चंद्रमा हमारे तारे यानी सूरज को ढंकता है। अंधेरा हो जाता है। तुरंत आसमान में तारे और अन्य ग्रह दिखने लगते हैं। जो आमतौर पर दिन में नहीं दिखाई देते। आपको सूरज का कोरोना भी देखने को मिल सकता है। यानी सूरज की बाहरी गर्म परत। जहां से सौर लहरें विस्फोट के साथ बाहर निकलती हैं।
360 डिग्री का सूर्योदय और सूर्यास्त
पूर्ण सूर्यग्रहण के समय आसमान में दो बार सूर्योदय और सूर्यास्त वाला नजारा दिखता है। अगर आप इस चीज का पैनोरमा फोटो बनाओ तो आपको दोनों ही नजारे एक साथ देखने को मिल सकते हैं। लेकिन ये आपको ग्रहण पर ही दिखेगा।

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author

Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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