भारत ने जिम्बाब्वे को आखिरी टी-20 मैच में 42 रनों से हराया और 4-1 की जीत के साथ शृंखला पर कब्जा जमाया केंद्रीय वित्त मंत्रालय की मंजूरी से महिला आईआरएस अधिकारी पुरुष बनी..! अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भाषण के दौरान चली गोलियां, बाल-बाल बचे..सुरक्षा अधिकारियों ने हमलावरों को किया ढेर आज है विक्रम संवत् 2081 के आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की अष्ठमी तिथि सायं 05:26 बजे तक तदुपरांत नवमी तिथि प्रारंभ यानी रविवार, 14 जुलाई 2024
प. बंगाल में  कैबिनेट ने लिया फैसला, अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में बांग्ला भाषा पढ़ाना अनिवार्य

पश्चिम बंगाल में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में बंगाली पढ़ाना अनिवार्य

एजुकेशन, जॉब्स और करियर

प. बंगाल में कैबिनेट ने लिया फैसला, अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में बांग्ला भाषा पढ़ाना अनिवार्य

एजुकेशन, जॉब्स और करियर/निजी/West Bengal/Kolkata :

पश्चिम बंगाल कैबिनेट द्वारा अनुमोदित राज्य की शिक्षा नीति ने राज्य में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में बंगाली पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है।

कैबिनेट ने सरकार को राज्य में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में बंगाली को अनिवार्य बनाने का निर्देश दिया है। कई मामलों में देखा गया है कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में बंगाली भाषा को महत्व नहीं दिया जाता है। अंग्रेजी के बाद छात्र बंगाली की जगह हिंदी या अन्य भाषा को स्कूल में दूसरी भाषा के रूप में चुन रहे हैं। माता-पिता को भी बुरा नहीं लगता। हालांकि, सोमवार की कैबिनेट द्वारा अनुमोदित राज्य शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में बंगाली पढ़ाना अनिवार्य है।

 पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों में बांग्ला को अनिवार्य रूप से दूसरी भाषा बनाने के प्रस्ताव को सोमवार को मंजूरी दे दी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में निजी स्कूलों के खिलाफ शिकायतों की जांच करने के लिए एक शिक्षा आयोग गठित करने को भी मंजूरी दी गई।

जाने क्या बोले अधिकारी
अधिकारी के अनुसार ,“दूसरी भाषा के रूप में बांग्ला चुनने का विकल्प है, लेकिन अधिकांश छात्र हिंदी या अन्य भाषाओं को चुनते हैं। नतीजा यह हुआ कि छात्र बांग्ला ठीक से नहीं सीख पा रहे हैं।” उन्होंने कहा, “आज, राज्य कैबिनेट ने इसे बदलने का फैसला किया, और राज्य के सभी अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों में बांग्ला को अनिवार्य रूप से दूसरी भाषा कर दिया।” उन्होंने कहा कि शिक्षा आयोग का गठन स्वास्थ्य आयोग की तर्ज पर किया जाएगा, जिसका प्रमुख एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश होगा।

अधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार की नई शिक्षा नीति के अनुसार, कक्षा 5-8 के छात्रों को प्राथमिकता वाली भाषा के रूप में बंगाली के साथ तीन भाषाएँ सीखनी होंगी। तीसरी भाषा स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा के साथ-साथ विदेशी भाषा भी हो सकती है, लेकिन प्राथमिकता बंगाली, संस्कृत या हिंदी को दी जा सकती है। मुख्य विचार पश्चिम बंगाल में युवाओं को बंगाली सिखाना है।

 


 

You can share this post!

author

सौम्या बी श्रीवास्तव

By News Thikhana

Comments

Leave Comments