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चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को हर चल-अचल संपत्ति की जानकारी हलफनामे में देने की जरूरत नहींः सर्वोच्च न्यायालय

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चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को हर चल-अचल संपत्ति की जानकारी हलफनामे में देने की जरूरत नहींः सर्वोच्च न्यायालय

राजनीति//Delhi/New Delhi :

सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को अपनी हरेक चल-अचल संपत्ति की जानकारी देने की जरूरत नहीं है। अरुणाचल प्रदेश के एक निर्दलीय विधायक के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला करते हुए कहा, उम्मीदवारों को केवल 'महत्वपूर्ण' संपत्ति का खुलासा करने की ही आवश्यकता है जिससे मतदाताओं को उनकी वित्तीय स्थिति और लाइफस्टाइल की समझ हो सके। सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपने या आश्रितों के स्वामित्व वाली हर चल संपत्ति का खुलासा करने की आवश्यकता नहीं है। 

बता दें कि अरुणाचल प्रदेश के करीखो क्री ने 23 मई, 2019 को एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव जीता था। अरुणाचल प्रदेश के 44-तेजू विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने जीत दर्ज की थी। हालांकि, उन्होंने चुनावी हलफनामे में अपनी पत्नी और बेटे के नाम तीन गाड़ियों का जिक्र अपनी संपत्ति में घोषित नहीं किया, जिसके कारण उनका चुनाव रद्द करने की मांग उठाई गई। मामला गुवाहाटी उच्च न्यायालय पहुंचा जहां करीखो क्री के चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया गया।

पिछले साल जुलाई में गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी  थी। अब अदालत ने इस मामले में सला सुनाया। करीखो क्री ने पूरे मामले में बताया कि जिन तीन गाड़ियों के बारे हलफनामे में जिक्र की बात कही जा रही वो उन्होंने पहले ही बेच दिया था। इसमें एक स्कूटर, एक मारुति ओमनी वैन जो एम्बुलेंस के रूप में उपयोग की जाती थी और एक टीवीएस स्टार सिटी मोटरसाइकिल थी। स्कूटर को 2009 में स्क्रैप तौर पर बेच दिया गया था। इसके अलावा अन्य दो गाड़ियां भी बेच दी गई थी। हाईकोर्ट ने खरीदारों के बयानों की जांच नहीं की।

सर्वोच्च न्यायालय ने विधायक क्री के पक्ष में सुनाया फैसला

ऐसे में जब मामला सुप्रीम कोर्ट में गया तो जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने करीखो क्री के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि बेचे गए किसी भी वाहन को उनकी संपत्ति नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गाड़ियों का खुलासा न करना चुनाव परिणाम पर कोई खास असर नहीं डालता। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने 9 अप्रैल को फैसले कहा कि 'पर्याप्त' संपत्ति जो मतदाता को उम्मीदवार की जीवनशैली या संपन्नता के बारे में जानकारी देती है, उसका खुलासा किया जाना चाहिए। हालांकि, ये जरूरी नहीं कि एक उम्मीदवार चल संपत्ति के हर आइटम जैसे कपड़े, जूते, क्रॉकरी, स्टेशनरी, फर्नीचर आदि की घोषणा करे जो उसके पास या उसके आश्रित परिजनों के पास है।

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