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कराची बंदरगाह पर दिखे चीन के वॉरशिप और सबमरीन, भारत के लिए इसके क्या हैं मायने?

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कराची बंदरगाह पर दिखे चीन के वॉरशिप और सबमरीन, भारत के लिए इसके क्या हैं मायने?

सेना/नौसेना// :

सी गार्जियन-3 अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है, जब चीन ने हिंद महासागर के पानी में अपनी समुद्री मौजूदगी का काफी विस्तार किया है। इसमें अफ्रीका के हॉर्न स्थित जिबूती में एक प्रमुख बेस का निर्माण और क्षेत्रीय नौसेनाओं को कई आधुनिक प्लेटफार्मों की बिक्री भी शामिल है।

पाकिस्तान की नौसेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना साझा अभ्यास कर रही हैं। दोनों नौसेनाओं के साझा अभ्यास सी गार्जियन-2023 की शुरुआत शनिवार को कराची में पाकिस्तानी नौसेना डॉकयार्ड में किया गया। इस साझा सैन्य अभ्यास की कुछ हाई रिजॉल्यूशन वाली सैटेलाइट तस्वीरें एक्सेस की गई हैं। इसमें कराची पोर्ट पर चीन के कई फ्रंटलाइन युद्धपोत, एक पनडुब्बी और डॉकयार्ड देखे जा सकते हैं।
हिंद महासागर में मौजूदगी का विस्तार
सी गार्जियन-3 अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है, जब चीन ने हिंद महासागर के पानी में अपनी समुद्री मौजूदगी का काफी विस्तार किया है। इसमें अफ्रीका के हॉर्न स्थित जिबूती में एक प्रमुख बेस का निर्माण और क्षेत्रीय नौसेनाओं को कई आधुनिक प्लेटफार्मों की बिक्री भी शामिल है। हाल ही में चीन ने पाकिस्तानी नौसेना को 4 फ्रिगेट भी दिए हैं।
चीनी सर्विलांस और समुद्र विज्ञान सर्वेक्षण जहाजों के फेरे
पिछले साल हिंद महासागर में कई चीनी सर्विलांस और समुद्र विज्ञान सर्वेक्षण जहाजों का भी पता चला है। इस महीने की शुरुआत में चीन का एक महासागर अनुसंधान जहाज कोलंबो में रुका था, फिर ये तमिलनाडु के समुद्र तट और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के बीच उत्तर में बंगाल की खाड़ी में चला गया। यह व्यापक रूप से माना जाता है कि चीन पूरे क्षेत्र में व्यापक पनडु्ब्बी ऑपरेशन को सक्षम करने के लिए बंगाल की खाड़ी समेत हिंद महासागर के पानी की सक्रिय रूप से मॉनिटरिंग कर रहा है।
अरब सागर में बढ़ रही चीन की मौजूदगी
कराची में खड़ी चीनी नौसैनिक जहाजों में टाइप 039 डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी भी शामिल है। इसकी सटीक क्षमता भी चीनी नौसेना के रहस्यों में छिपी हुई है। अरब सागर के पानी में नाव की मौजूदगी अपने घरेलू बंदरगाहों से कई हजार किलोमीटर दूर नौसेना की संपत्ति को तैनात करने में सक्षम होने में बीजिंग के भरोसे को भी दिखाती है।
सबसे तेज परमाणु पनडुब्बी
ऐसा माना जाता है कि 2013 के बाद से चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी के हिंद महासागर में पनडुब्बी तैनात करने के बाद यह आठवां साझा सैन्य अभ्यास है। चीन को हिंद महासागर में परमाणु ऊर्जा से चलने वाली तेज पनडु्ब्बी के लिए भी जाना जाता है। ये पनडुब्बी समुद्र में सैद्धांतिक रूप से अनिश्चित काल तक डूबी रह सकती हैं, क्योंकि जहाज पर सप्लाई भरने के अलावा उन्हें सतह पर आने की जरूरत नहीं है। 
भारत ने ट्रैक कर लिए थे जहाज
सी गार्जियन-3 अभ्यास के लिए हिंद महासागर में चीन के युद्धपोत की तैनाती का सर्विलांस करने वाले सूत्रों का कहना है कि मलक्का जलडमरूमध्य के जरिए क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद टाइप -039 पनडुब्बी और उसके साथ आने वाले सहायक जहाजों को नौसेना पी 8 टोही विमान से नियमित रूप से ट्रैक किया गया था। सूत्रों का कहना है कि यह इस बात का संकेत है कि भविष्य में इस क्षेत्र में चीन की बड़ी उपस्थिति क्या हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, ‘यह अगर-मगर का सवाल नहीं है कि चीन हिंद महासागर क्षेत्र में एक कैरियर बैटल ग्रुप (वाहक युद्ध समूह) को तैनात करने का फैसला कब करता है।’
पाकिस्तान खरीद रहा आठ पनडुब्बियां
अप्रैल 2015 में पाकिस्तान सरकार कथित तौर पर 5 बिलियन डॉलर के सौदे में टाइप 039 पनडुब्बियों के 8 वेरिएंट खरीदने पर सहमत हुई थी। इनमें से 4 पनडुब्बियों का निर्माण कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स करने वाला था। अभी तक किसी भी पनडुब्बी की डिलीवरी नहीं की गई है।
आसपास हो सकती हैं चीनी पनडुब्बियां
सैटेलाइट तस्वीरों में कराची में खड़ी चीनी टाइप 926 पनडुब्बी टेंडर की मौजूदगी का संकेत मिलता है। माना जाता है कि टाइप 926 पनडुब्बियों की उपस्थिति आसपास के क्षेत्र में चीनी पनडुब्बियों की उपस्थिति का एक संकेत है। चीनी युद्ध-समूह में 1 टाइप 52डी विध्वंसक, 2 टाइप 54 फ्रिगेट और 1 टाइप 903 रीप्लेनिशमेंट ऑयलर भी शामिल हैं। ये युद्धपोतों और पनडुब्बी को लंबी दूरी के संचालन को बनाए रखने में मदद करता है।
भारत की कड़ी निगरानी
चीनी नौसेना संपत्तियों पर नजर रखने की प्रक्रिया भारतीय नौसेना की एक लागातार कोशिश रही है। चीनी जहाज प्रमुख चोक पॉइंट्स, मलक्का जलडमरूमध्य, लोम्बोक या सुंडा जलडमरूमध्य के जरिए हिंद महासागर के पानी में प्रवेश करने के लिए पश्चिम की ओर जाते हैं। भारतीय नौसेना के पी-8 समुद्री टोही विमान और मिशन पर तैनात युद्धपोत अक्सर चीनी जहाजों को रोकने और लंबे समय तक उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तैनात रहते हैं।
अमेरिका के साथ मिलकर चीन पर लगाम
चीनी युद्धपोतों की आवाजाही पर नजर रखने में भारत, अमेरिका के साथ मिलकर काम करता है। अमेरिका अक्सर रियल टाइम खुफिया जानकारी के लिए भारत का एक प्रमुख समुद्री भागीदार रहा है। पिछले हफ्ते दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच नई दिल्ली में 2़ प्लस 2 वार्ता हुई थी। इसमें दोनों पक्षों ने ‘स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा के लिए अपनी मजबूत प्रतिबद्धता’ को रेखांकित किया था। 
कोलंबो पोर्ट पर अडाणी की मौजूदगी
वॉशिंगटन ने 8 नवंबर को कोलंबो पोर्ट टर्मिनल में 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा के निवेश की घोषणा करके श्रीलंका जैसे देशों में बीजिंग की बढ़ती आर्थिक ताकत को संतुलित करने के भारतीय प्रयासों का समर्थन किया। कोलंबो पोर्ट टर्मिनल को अदाणी ग्रुप की ओर से विकसित किया जा रहा है। श्रीलंका अपने बंदरगाहों और राजमार्गों से जुड़ी परियोजनाओं के लिए चीन से मिलने वाली फंडिंग पर बहुत ज्यादा निर्भर रहा है। इस देश को अपना कर्ज चुकाने में भी संघर्ष करना पड़ा है। गहरे पानी वाले हंबनटोटा बंदरगाह के मामले में ऐसा ही हुआ था। इसे श्रीलंका ने आर्थिक रूप से विकसित होने के बाद इस बंदरगाह को 99 वर्षों के लिए चीन को पट्टे पर दिया था। पिछले साल चीन का एक रिसर्च शिप युआन वांग 5, भारत द्वारा उठाई गई सुरक्षा चिंताओं के बावजूद हंबनटोटा में रुका था। बताया गया है कि ये जहाज ओडिशा के तट पर अब्दुल कलाम द्वीप से भारतीय मिसाइल परीक्षणों पर नजर रखने के मिशन पर था।

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Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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