चीन को उसी की भाषा में मिलेगा जवाब: बॉर्डर पर मंदारिन बोलने वाले आर्मी अफसर तैनात

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चीन को उसी की भाषा में मिलेगा जवाब: बॉर्डर पर मंदारिन बोलने वाले आर्मी अफसर तैनात

सेना//Delhi/New Delhi :

भारत की टेरिटोरियल आर्मी अपने उत्तरी, पूर्वी और मध्य कमांड में मंदारिन कोर्स पहले से ही चला रही है। इसके लिए सेना ने कई यूनिवर्सिटी से समझौता भी किया है।

इंडियन आर्मी ने भारत-चीन सीमा (एलएसी) पर चीन की भाषा मंदारिन बोलने वाले अफसर तैनात किए हैं। ये सभी अफसर भारतीय सेना की टेरिटोरियल आर्मी का हिस्सा हैं। पूर्वी लद्दाख में चल रहे भारत-चीन विवाद को सुलझाने में इनकी मदद ली जाएगी।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, मंदारिन लैंग्वेज में अच्छी पकड़ और अन्य जरूरी मानकों पर खरा उतरने के बाद 5 अफसरों को अगस्त में टेरिटोरियल आर्मी में शामिल किया गया है। ये पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ बॉर्डर पर होने वाली मीटिंग में मदद करने के लिए फॉरवर्ड पोस्ट पर रहेंगे। टेरिटोरियल आर्मी अपने उत्तरी, पूर्वी और मध्य कमांड में मंदारिन कोर्स पहले से ही चला रही है। इसके लिए सेना ने कई यूनिवर्सिटी से समझौता भी किया है।

कई राउंड की परीक्षा, 5 अफसर हुए भर्ती

मंदारिन बोलने में माहिर इन पांच अफसरों की भर्ती प्रक्रिया आसान नहीं थी। कैंडीडेट्स को कई राउंड से गुजरना पड़ा। पहला राउंड जनवरी में शुरू हुआ था और कुछ महीने पहले भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई। इसमें मंदारिन भाषा में पकड़ रखने वाले विभिन्न कैंडीडेट को पहले रिटेन एग्जाम, फिर इंटरव्यू से गुजरना पड़ा। आखिर में पांच अफसरों की अगस्त में भर्ती हुई। इसमें शामिल अफसरों की औसत उम्र 30 साल है।

बॉर्डर विवाद पर मीटिंग के दौरान बाइलिंगुअल का रोल

इन पांच अफसरों को लद्दाख में फॉरवर्ड बेस में तैनात किया गया है। वे भारत-चीन बॉर्डर मीटिंग के दौरान भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच बाइलिंगुअल (दो भाषा जानने वाले) की भूमिका निभाएंगे। लेकिन, उन्हें बॉर्डर पर होने वाली मीटिंग के अलावा अन्य नौकरियों में भी तैनात किया जा सकता है।

भारत-चीन के बीच 5 पॉइंट पर लड़ाई

भारत-चीन सेनाओं के बीच इसी साल अगस्त में 19वें राउंड की मीटिंग हुई थी। दोनों सेनाओं के बीच पांच पॉइंट को लेकर लड़ाई है।

उत्तरी लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी

अरुणाचल प्रदेश में किबिथू

लद्दाख में चुसुल

अरुणाचल प्रदेश में तवांग के पास बुम-ला

सिक्किम में नाथू-ला

3 साल पहले गलवान झड़प के बाद बढ़ा तनाव

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी पर करीब 3 साल पहले 2020 में हिंसक झड़प हुई थी। इसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे, जबकि 38 चीनी सैनिक मारे गए थे। हालांकि, चीन इसे लगातार छिपाता रहा। गलवान घाटी पर दोनों देशों के बीच 40 साल बाद ऐसी स्थिति पैदा हुई थी। गलवान पर हुई झड़प के पीछे की वजह यह थी कि गलवान नदी के एक सिरे पर भारतीय सैनिकों ने अस्थाई पुल बनाने का फैसला लिया था। चीन ने इस क्षेत्र में अवैध रूप से बुनियादी ढांचे का निर्माण करना शुरू कर दिया था। साथ ही, इस क्षेत्र में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा था।

जयशंकर ने कहा था- भारत-चीन बॉर्डर विवाद सबसे बड़ा चैलेंज

जुलाई 2023 में विदेश मंत्री एस। जयशंकर ब्रिक्स की एक मीटिंग में शामिल हुए थे। इस दौरान भी उनकी वांग यी के साथ बॉर्डर विवाद और शांति प्रयासों को लेकर चर्चा हुई थी। तब जयशंकर ने भारत-चीन बॉर्डर पर पिछले 3 सालों से जारी तनाव को अपने करियर का सबसे कठिन डिप्लोमैटिक चैलेंज बताया था।

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Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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