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 आराध्या बच्चन की याचिका पर कोर्ट ने लगायी यूट्यूब को लताड़ ; गूगल से यूट्यूब तक को दी सख्त चेतावनी

आराध्या बच्चन की याचिका पर कोर्ट ने गूगल से यूट्यूब तक को दी सख्त चेतावनी

अदालत

आराध्या बच्चन की याचिका पर कोर्ट ने लगायी यूट्यूब को लताड़ ; गूगल से यूट्यूब तक को दी सख्त चेतावनी

अदालत//Maharashtra/Mumbai :

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की 11 वर्षीय पोती आराध्या बच्चन ने अपने स्वास्थ्य और निजी जीवन के बारे में गलत जानकारी फैलाने के लिए यूट्यूब चैनल के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।आज  दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच के जस्टिस सी. हरिशंकर इस मामले की सुनवाई की और यूट्यूब और गूगल को गलत व भ्रामक ख़बरों पर कोई नियंत्रण न होने के कारण लताड़ लगायी और कुछ सवालों के जवाब तलब किये ।

 

आराध्य व बच्चन परिवार का क्या कहना है

आराध्या की दलील के अनुसार, इन वीडियो से संकेत मिलता है कि उसका स्वास्थ्य खराब है और उनमें से एक का मतलब यह भी है कि उसका निधन हो गया है। इसके अलावा ,इन वीडियो में यह भी दावा किया गया था कि बच्चन परिवार ने आराध्या की शीघ्र चिकित्सा के लिए कुछ ख़ास कदम नहीं उठाये।आराध्य बच्चन ने उसके बारे में इस तरह की रिपोर्टिंग को रोकने के लिए उन्हें बैन  का अनुरोध किया है। आराध्या द्वारा उसके बारे में “सभी वीडियो को डी-लिस्ट और निष्क्रिय करने” के लिए दस संगठनों से संपर्क किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के शिकायत प्रकोष्ठ के साथ-साथ गूगल को मुकदमे में पक्षकार के रूप में जोड़ा गया है।

कोर्ट ने भ्रामक समाचार फ़ैलाने वाले चैनलों को लगायी लताड़ 
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता  की शिकायत यह है कि वह मुंबई के एक स्कूल में पढ़ने वाली एक स्वस्थ स्कूली बच्ची हैं, लेकिन कुछ दुष्ट लोग केवल प्रचार के लिए कुछ समय से यूट्यूब पर यह कहते हुए वीडियो प्रसारित कर रहे हैं कि वादी गंभीर रूप से बीमार है। यहां तक ​​कि एक वीडियो में तो यह भी दावा किया गया कि वह अब नहीं रही।कोर्ट ने कहा कि जाहिर तौर पर मॉर्फ्ड तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया गया है। इस तरह के वीडियो वादी के निजता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं और आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश डिजिटल मीडिया नैतिकता) नियमों का उल्लंघन है।

अदालत ने कहा "हर बच्चे को सम्मान पाने का अधिकार"
कोर्ट ने कहा कि सेलिब्रिटी से लेकर सामान्य बच्चे को सम्मान पाने का अधिकार है, विशेष रूप से बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में भ्रामक जानकारी का प्रसार कानून में पूरी तरह से असहनीय है। इस अदालत ने मामले से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो क्लिप देखी हैं और यह पहली बार नहीं है कि इस तरह की भ्रामक जानकारी मशहूर हस्तियों के लिए प्रसारित की जाती है, लेकिन जब ऐसी जानकारी किसी बच्चे के संबंध में प्रसारित की जाती है तो यह ऐसा करने वालों की विकृति को दर्शाता है।

आराध्या बच्चन से जुड़ी हर सामग्री प्रसारण से प्रतिबंधित
कोर्ट ने आदेश दिया कि यूट्यूब से लेकर सभी आरोपी चैनल्स को शिकायतकर्ता की शारीरिक स्थिति से जुड़े सभी वीडियो को प्रकाशित करने, अपलोड करने या प्रसारित करने से भी प्रतिबंधित किया गया है। अदालत ने कहा कि दूसरे शब्दों में प्रतिवादियों को वादी के मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी किसी भी मंच पर प्रसारित करने से पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाता है।

सभी आरोपी चैनलों पर लगाया बैन 
अंतरिम राहत देने के संबंध में विस्तार से चर्चा करने के बाद अदालत ने आदेश दिया कि यूट्यूब चैनल से लेकर सभी प्रतिवादी व उनके सहयोगी और उनकी ओर से काम करने वाले अन्य लोगों को वाद में दिए गए वीडियो को प्रसारित करने या आगे प्रसारित करने से रोका जाता है।

'एक सप्ताह के अंदर हो आदेश की पालना '
कोर्ट  ने कहा कि शिकायतकर्ता के शारीरिक स्वास्थ्य से संबंधित यूट्यूब प्लेटफार्म पर अपलोड किए गए किसी अन्य वीडियो की जानकारी गूगल की जानकारी में लाने पर इसे तुरंत हटाया जाएगा। हालांकि वादी को इसकी जानकारी अदालत को देनी होगी। अदालत ने कहा कि उक्त आदेश का अनुपालन आज से एक सप्ताह की अवधि के भीतर सुनिश्चित किया जाए।

हालाँकि बच्चन परिवार ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान तो जारी नहीं किया है परन्तु  अभिषेक बच्चन ने अपनी लेटेस्ट फिल्म बॉब बिस्वास का प्रमोशन करते हुए ट्रोलर्स को चेतावनी जारी की। उन्होंने एंटरटेनमेंट मीडिया से कहा कि " यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है, चूंकि मैं प्रसिद्ध हूं, यह ठीक है; मेरी बेटी के लिए किसी को अनुमति नहीं है। अगर आपको कुछ कहना है तो मुझसे बात करें।" कोर्ट ने इसके साथ ही मामले में सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई नौ मई तक के लिए स्थगित कर दी।

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सौम्या बी श्रीवास्तव

By News Thikhana

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