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भारत के साथ गद्दारी दुश्मन को भी रास नहीं आती, अपनी सरजमीं पर मौत भी नसीब ना हुई करगिल के खूनी को..!

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भारत के साथ गद्दारी दुश्मन को भी रास नहीं आती, अपनी सरजमीं पर मौत भी नसीब ना हुई करगिल के खूनी को..!

अजब-गजब//Rajasthan/Jaipur :

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का दुबई के एक अस्पताल में रविवार, 5 फरवरी 2023 को निधन हो गया। इस आशय की जानकारी मुशर्रफ के परिवार ने साझा की है। मुशर्रफ के परिजनों के अनुसार मुशर्रफ एमाइलॉयडोसिस के शिकार थे और कुछ हफ्तों से अस्पताल में भर्ती थे। जिंदगी और मौत के संघर्ष में आखिरकार वो हार गये। भारत की राजधानी नयी दिल्ली में जन्मे परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान की सेना में कार्य करते हुए राष्ट्रपति का पद तक संभाला लेकिन भारत के साथ गद्दारी दुश्मन को भी रास नहीं आती।  करगिल के इस खूनी को अपने वतन में भी मौत नसीब नहीं हो सकी।

उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष जून में मुशर्रफ के परिवार की ओर से ट्वीट कर जानकारी दी गयी थी कि पूर्व सेना प्रमुख ऐसी स्थिति में हैं जिसमें उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही है। उनकी बीमारी से बाहर आने की संभावना कम ही लग रही है। यद्यपि मुशर्रफ के परिवार की ओर से यह स्पष्ट किया गया था कि अलबत्ता वे वेंटिलेटर पर नहीं हैं फिर भी लोगों से प्रार्थना उनके लिए दुआ करने का आग्रह किया गया था।

बता दें कि वर्ष 1999 में सफल सैन्य तख्तापलट के बाद परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान के दसवें राष्ट्रपति बन गये थे। मुशर्रफ ने 1998 से 2001 तक पाकिस्तान के 10वें चेयरमैन ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) और 1998 से 2007 तक 7वें शीर्ष जनरल के रूप में कार्य किया। वे वर्ष 1961 में परवेज मुशर्रफ ने 18 साल की उम्र में काकुल में पाकिस्तान सैन्य अकादमी में प्रवेश किया था. 

युद्ध क्षेत्र और मुशर्रफ

द्वितीय कश्मीर युद्ध में खेमकरण सेक्टर के लिए लड़ाई के दौरान मुशर्रफ का पहला युद्धक्षेत्र अनुभव एक तोपखाना रेजिमेंट के साथ था। मुशर्रफ ने संघर्ष के दौरान लाहौर और सियालकोट युद्ध क्षेत्रों में भी भाग लिया था। उन्हें वीरता के लिए इम्तियाज़ी सनद पदक मिला। 1965 के युद्ध की समाप्ति के तुरंत बाद मुशर्रफ को कुलीन विशेष सेवा समूह में शामिल हो किया गया था. उन्होंने 1966 से 1972 तक SSG में सेवा की।

तत्कालीन पाकिस्तान आर्मी के प्रमुख परवेज मुशर्रफ ही करगिल संघर्ष  के पीछे एक प्रमुख रणनीतिकार माने जाते हैं। वर्ष 1999 में मार्च से मई तक उन्होंने करगिल जिले में गुप्त घुसपैठ का आदेश दिया था। इसके बाद, जैसे ही इस बात की भनक भारत को लगी तो दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हो गया। इस युद्ध में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी और मुशर्रफ की भी बहुत किरकिरी हुई थी.

दिल्ली में  हुआ था परवेज मुशर्रफ का जन्म
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ का जन्म 11 अगस्त 1943 को दिल्ली के दरियागंज इलाके में हुआ था। वर्ष 1947 में भारत विभाजन के कुछ दिन पहले ही उनके पूरे परिवार ने पाकिस्तान जाने का फैसला किया था। उनके वालिद पाकिस्तान सरकार में काम करते थे।
मुशर्रफ पर लगा था राजद्रोह का आरोप
वर्ष 1999 से 2008 तक पाकिस्तान पर शासन करने वाले 78 वर्षीय जनरल मुशर्रफ पर उच्च राजद्रोह का आरोप लगाया गया था और 2019 में संविधान को निलंबित करने के लिए उन्हें मौत की सजा दी गई थी। बाद में उनकी मौत की सजा को निलंबित कर दिया गया था। वर्ष 2020 में लाहौर उच्च न्यायालय ने मुशर्रफ के खिलाफ नवाज शरीफ सरकार द्वारा की गई सभी कार्रवाइयों को असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जिसमें उच्च राजद्रोह के आरोप पर शिकायत दर्ज करना और एक विशेष अदालत के गठन के साथ-साथ इसकी कार्यवाही भी शामिल थी। 

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