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अगले दो दिन दिल्ली कूच नहीं करेंगे किसान, दिनभर क्या-क्या हुआ, 10 पॉइंट्स में सब समझिए

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अगले दो दिन दिल्ली कूच नहीं करेंगे किसान, दिनभर क्या-क्या हुआ, 10 पॉइंट्स में सब समझिए

राजनीति//Delhi/New Delhi :

न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर कानून बनाने, कर्ज माफी समेत अन्य मांगों को लेकर किसानों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच किसानों ने बुधवार को फैसला किया कि वे अगले दो दिन के लिए अपने दिल्ली कूच को रोक देंगे। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने यह जानकारी दी।

सरकार के साथ बातचीत में गतिरोध के बीच किसान संगठनों ने ‘दिल्ली चलो’ मार्च दो दिन के लिए स्थगित किया है। किसान संगठनों का कहना है कि दो दिन बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि हम लोग शुक्रवार शाम को आगे की रणनीति तय करेंगे। 
उन्होंने कहा कि सरकार हमारी मांगों को नहीं मान रही है। वहीं, भारतीय किसान यूनियन भी चंडीगढ़ में गुरुवार को अहम बैठक करने वाली है। वहीं, हरियाणा-पंजाब के शंभू बॉर्डर पर पुलिस की तरफ से आंसू गैस छोड़े जाने के बाद एक किसान की मौत भी हो गई।
किसानों ने शुरू किया था दिल्ली मार्च 
सरकार से बातचीत के बाद किसानों ने मंगलवार को फिर से दिल्ली चलो मार्च शुरू किया था। किसान नेताओं ने गतिरोध को तोड़ने के लिए दोनों पक्षों के बीच चैथे दौर की वार्ता में सरकार की तरफ से दिए गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद घोषणा की थी कि इन दोनों सीमा बिंदुओं पर डेरा डाले हुए पंजाब के हजारों किसान बुधवार सुबह अपना आंदोलन फिर से शुरू करेंगे।
एमएसपी की कानूनी गारंटी पर अध्यादेश की मांग
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने केन्द्र सरकार से शनिवार को मांग की कि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने के लिए अध्यादेश लाए। पंधेर ने शंभू बॉर्डर पर कहा कि अगर केन्द्र सरकार चाहे तो वह रातों रात अध्यादेश ला सकती है। अगर सरकार किसानों के आंदोलन का कोई समाधान चाहती है तो उसे यह अध्यादेश लाना चाहिए कि वह एमएसपी पर कानून लागू करेगी, तब बातचीत आगे बढ़ सकती है। पंधेर ने कहा कि जहां तक तौर तरीकों की बात है तो कोई भी अध्यादेश छह माह तक वैध होता है। कृषि ऋण माफी के मुद्दे पर पंधेर ने कहा कि सरकार कह रही है कि ऋण राशि का आकलन करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस संबंध में बैंकों से आंकड़े एकत्र कर सकती है। यह इच्छाशक्ति की बात है।
सभी मुद्दों पर बातचीत हो रही है
केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा का कहना है कि सरकार का जोर बातचीत पर है। केंद्रीय मंत्री मुंडा का कहना है कि सभी मुद्दों पर बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों और सरकार के बीच बातचीत रविवार को भी जारी रहेगी। इससे पहले 15 फरवरी बृहस्पतिवार को तीसरे दौर की बातचीत शुरू हुई थी। बातचीत में दोनों पक्षों के बीच बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला। किसान नेताओं और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच बृहस्पतिवार रात करीब 8ः45 बजे बैठक शुरू हुई। यह बातचीत पांच घंटे तक जारी रही लेकिन इसमें दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बनी। किसानों की तरफ से एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के साथ ही किसान कृषकों के कल्याण के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन और कर्ज माफी, लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए श्न्यायश्, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है।
दुश्मनों जैसे व्यवहार का आरोप
किसानों का कहना है कि सरकार उनके साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रही है। किसानों का कहना है कि हमारे ऊपर ड्रोन से मोर्टार बरसाए जा रहे हैं। इसके अलावा हमारे साथ आंदोलन में शामिल युवाओं को उकसाने की कोशिश भी की जा रही है। किसानों ने पुलिस के एक वीडियो का भी जवाब दिया। किसानों का कहना है कि पुलिस पता नहीं कहां से वीडियो लेकर आई है। इसमें हमारी तरफ से जानबूझ कर पुलिक को उकसाने का आरोप लगाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि हम लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं जबकि पुलिस हमपर बल प्रयोग कर रही है। इससे पहले हरियाणा पुलिस ने शुक्रवार को कई किसानों का वीडियो जारी किया था। वीडियो अंबाला के पास शंभू बॉर्डर पर पथराव करते प्रदर्शनकारी दिखाए गए थे। इसके साथ ही सुरक्षा कर्मियों को उकसाने का प्रयास करते देखा गया है। हरियाणा पुलिस की तरफ से ‘एक्स’ पर एक वीडियो शेयर किया गया। वीडियो में चेहरे ढके हुए कई युवा प्रदर्शनकारियों को शंभू सीमा पर सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर फेंकते देखा जा सकता है।
प्रतिदिन 500 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान

उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का कहना है कि किसान आंदोलन के लंबा चलने से उत्तरी राज्यों में व्यापार और उद्योग को ‘गंभीर नुकसान’ पहुंच सकता है। उद्योग मंडल का कहना है कि किसान आंदोलन से रोजगार को भारी नुकसान होने की आशंका है। इससे प्रतिदिन 500 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान होगा। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन से प्रतिदिन 500 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होगा। इससे उत्तरी राज्यों मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के चैथी तिमाही के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उद्योग मंडल देश में सभी के कल्याण के लिए आम सहमति के साथ सरकार और किसानों दोनों से मुद्दों के शीघ्र समाधान की आशा करता है।
पंचायत के बाद आएंगे टिकैत
किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत पंचायत के बाद किसान आंदोलन में शामिल होने पर फैसला करेंगे। टिकैत ने दिल्ली जाने की योजना पर कहा कि सिसौली (मुजफ्फरनगर) में एक मासिक पंचायत है। पंचायत में शामिल होने के बाद आगे की रणनीति तय होगी। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का कहना है कि वह आने वाले दिनों में आंदोलन तेज करेगा। एसकेएम ने कहा उनकी पंजाब इकाई 18 फरवरी को जालंधर में एक बैठक करेगी और इसके बाद घटनाक्रम की समीक्षा करने और भविष्य की रणनीति के लिए सुझाव देने के खातिर नयी दिल्ली में एनसीसी और आम सभा की बैठकें होंगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान में कहा कि एसकेएम ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। श्रमिकों और अन्य सभी वर्गों के समन्वय के साथ बड़े पैमाने पर आह्वान करके आंदोलन को तेज किया जाएगा।
एक किसान की मौत 
हरियाणा में पुलिस ने शंभू और खनौरी सीमा पर किसानों द्वारा अवरोधक तोड़ने के प्रयासों को विफल करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। इससे एक किसान की मौत हो गई और अन्य कुछ लोग घायल हो गए। किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने कहा कि पीड़ित की पहचान पंजाब के बठिंडा जिले के बालोके गांव के निवासी शुभकरण सिंह (21) के रूप में की गई है। किसानों ने दावा किया कि हरियाणा पुलिस के कर्मियों ने आंसू गैस के गोले के अलावा रबड़ की गोलियां भी चलाई।
शंभू बॉर्डर पर जमावड़ा
केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसान 13 फरवरी से अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली, मिनी-वैन और पिकअप ट्रक के साथ सीमा बिंदुओं पर डेरा डाले हुए हैं। विरोध स्थलों पर खुदाई करने वाले यंत्रों और ट्रैक्टरों सहित मिट्टी हटाने वाले बुलडोजर आदि उपकरण देखे गए। पुलिस ने चेतावनी दी कि इनका उपयोग अवरोधक को तोड़ने और सुरक्षा कर्मियों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।
संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक
संयुक्त किसान मोर्चा चंडीगढ़ में गुरुवार को अहम बैठक कर रहा है। बैठक के बाद किसानों के आंदोलन को लेकर रणनीति तय की जाएगी। संयुक्त किसान मोर्चा हालांकि, किसानों के इस आंदोलन में भले ही शामिल नहीं है लेकिन पूरे घटनाक्रम पर उसकी नजर है। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ जो हो रहा है वह दुखद है। उन्होंने कहा कि सरकार एमएसपी की गारंटी को लेकर कानून बनाने से क्यों हिचक रही है।
कृषि मंत्री ने दिया बातचीत का न्योता 
कृषि मंत्री मुंडा ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने की अपील की है। उन्होंने एमएसपी समेत सभी मुद्दों पर पांचवें दौर की बातचीत के लिए नेताओं को आमंत्रित किया है। किसान नेताओं के साथ आखिरी दौर की बातचीत में तीन केंद्रीय मंत्रियों की समिति ने रविवार को प्रस्ताव दिया था कि किसानों के साथ समझौता करने के बाद सरकारी एजेंसियां पांच साल तक दालें, मक्का और कपास एमएसपी पर खरीदेंगी।
शांति बनाए रखने की अपील
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने शंभू में आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए उनसे कहा कि अगर वे जीतना चाहते हैं तो शांति बनाए रखें। उन्होंने किसानों से सवाल किया, ष्क्या आप जीतना चाहते हैं या नहीं? उन्होंने निरस्त किए गए कृषि कानूनों के खिलाफ 2020-21 के आंदोलन के दौरान किसानों की श्जीतश् का भी उल्लेख किया। डल्लेवाल ने किसानों को आगाह किया कि वे ऐसे तत्वों से सावधान रहें जो आंदोलन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
दिल्ली के बॉर्डर पर किलेबंदी
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च फिर से शुरू करने की घोषणा के बाद बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी। सुरक्षाकर्मियों को टीकरी, सिंघू और गाजीपुर सीमाओं पर कड़ी निगरानी करने का निर्देश दिया है। कानून- व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात करने के बाद दिल्ली-गुरुग्राम, दिल्ली-बहादुरगढ़ और कई अन्य सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित रहा।
यूपी में बीकेयू निकालेगा ट्रैक्टर मार्च

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अपनी मांगों को लेकर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे किसान 23 फरवरी को दिल्ली कूच की तैयारी कर रहे हैं। इन किसानों को अब कई अन्य किसान संगठनों का भी समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ग्रेटर नोएडा के परी चैक से लेकर सूरजपुर कलेक्ट्रेट तक ट्रैक्टर मार्च निकलेगा। देश में हो रहे किसान आंदोलन के समर्थन में और नोएडा में किसानों की समस्याओं को लेकर यह प्रदर्शन किया जा रहा है। किसानों को मनाने के लिए मंगलवार को भी नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, डीएम और अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी की अगुआई में एक बैठक की गई। ये बैठक करीब दो से ढाई घंटे चली, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।
हम चुनाव में उनको भी गांव नहीं आने देंगे 
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली जा रहे किसानों को रोके जाने पर कहा कि अगर वे (सरकार) किसानों को दिल्ली नहीं आने दे रहे हैं तो चुनाव में किसान भी उन्हें गांव में नहीं आने देंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान, किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने समेत विभिन्न मांगों को लेकर मेरठ में भाकियू की ओर से जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया गया। टिकैत स्वयं ट्रैक्टर चलाते हुए किसानों के साथ कचहरी पहुंचे। इस दौरान पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए कई जगह अवरोधक भी लगाये थे, मगर किसान उन्हें जबरन रास्ते से हटाते हुए आगे बढ़ गए।
उत्तराखंड के रुद्रपुर में किसानों ने धरना दिया
किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में बुधवार को उत्तराखंड के रुद्रपुर शहर में जिला कलेक्ट्रेट के सामने धरना दिया। रुद्रपुर में किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। पुलिस ने उन्हें कार्यालय के बाहर ही रोक दिया और इसके बाद वे वहां बैठ गये और उन्होंने अपनी मांगों को उठाया। किसानों ने कहा कि देश के लाखों किसान अपनी उचित मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन केंद्र उन्हें झूठे आश्वासन देकर गुमराह कर रहा है। तराई किसान यूनियन के प्रमुख तजेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हम पीछे नहीं हटेंगे।

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author

Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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