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सूखे के कारण नदी में दिखे इंसानी चेहरे ! साइंटिस्ट भी चकराए, अब उठेगा रहस्य से पर्दा

अजब-गजब

सूखे के कारण नदी में दिखे इंसानी चेहरे ! साइंटिस्ट भी चकराए, अब उठेगा रहस्य से पर्दा

अजब-गजब///Washington :

ब्राजील के अमेजन रेनफॉरेस्ट में एक नदी के किनारे चट्टानों पर उकेरे हुए प्राचीन मानव चेहरे सामने आए हैं, जो 2000 साल पुराने माने जा रहे हैं। अब वैज्ञानिक इनका रहस्य पता करने में जुटे हुए हैं।

अमेजन रेनफॉरेस्ट में इंसानी चेहरों के अजीब नक्काशियां देखी गई हैं, जो 2000 साल पुरानी मानी जा रही हैं। ये आकृतियां उन चट्टानों पर बनी हुई हैं, जो सालों से नीग्रो नदी के पानी के नीचे दबी हुई थीं, अब सूखे के कारण दूसरी बार फिर दुनिया के सामने आई हैं। इससे पहले यह आर्टवर्क 2010 में देखा गया था और वह भी सिर्फ एक दिन के लिए। जब साइंटिस्ट्स ने इन ‘इंसानी चेहरों’ को देखा तो वे दंग रह गए, अब वे इनका मतलब समझने में जुटे हुए हैं और उनको उम्मीद है जल्द ही इनके प्राचीन रहस्य से पर्दा उठ सकेगा।
कहां मिलीं हैं ये नक्काशियां 
डेलीस्टार की रिपोर्ट के अनुसार, प्राचीन मानवीय चेहरों की नक्काशियां ब्राजील के मनौस के पास नदी के तल पर पाई गई हैं, जहां रियो नीग्रो और अमेजन मिलते हैं। गौरतलब है कि नीग्रो नदी अमेजन रिवर की सहायक नदी है, जिसका का स्रोत कोलंबिया में है, जबकि यह वेनेजुएला और फिर ब्राजील के अमेजन में बहती है, जिसका मुहाना मनौस सिटी में है।
क्या कहलाते हैं ये चेहरे
मानवीय चेहरों के साथ-साथ कलाकृतियां पानी और जानवरों को भी दर्शाती हैं। एंशिएंट ओरिजिन्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह केवल दूसरी बार है, जब ब्राजील में हाल के दिनों में नक्काशी देखी गई हैं। इन आकृतियों को ‘पेट्रोग्लिफ्स’ कहा जाता है।
क्या दर्शाती हैं ये नक्काशियां? 
एक्सपर्ट्स के अनुसार, मानवीय चेहरों की नक्काशियां कुल्हाड़ियों से तैयार की गई होंगी, जो आकार में चैकोर हैं। उन आकृतियों में सभी के मुंह हैं, लेकिन कुछ की नाक गायब है। ब्राजीलियन इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्टोरिकल हेरिटेज के जैमे ओलिवेरा ने कहा कि ये तस्वीरें ‘कॉम्प्लेक्स ग्राफिक आर्ट’ हैं। नक्काशी में खुश और उदास दोनों चेहरे हैं। ऐसा माना जाता है कि यह शिकारी और शिकार को दर्शाती हैं।
मतलब जानने में जुटे साइंटिस्ट्स
साइंटिस्ट्स इन अजीब मानवीय चेहरों वाली नक्काशियों को लेकर आश्चर्यचकित हैं, वे इनका मतलब जानने में जुटे हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि नक्काशी उस स्थान पर की गई थी, जहां कभी लोग रहते थे। ओलिविरा ने कहा कि प्राचीन अमेजोनियों ने सूखे की अवधि को ‘हम जो अब अनुभव कर रहे हैं, उससे भी अधिक गंभीर’ सहन किया होगा।
पानी भरने से पहले जांच में तेजी
अगले महीने रियो नीग्रो में पानी का स्तर बढ़ने की उम्मीद है, जिससे ये नक्काशियां फिर से पानी में डूब जाएंगी। ये देखते हुए एक्सपर्ट्स के बीच इनको पूरी तरह से डॉक्यूमेंटेड करने की होड़-सी मची हुई है।

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Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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