ध्य प्रदेश के चर्चित जस्टिस रोहित आर्य ने भाजपा का दामन थामा प्रशिक्षु आईएएस पूजा खेडकर के विरुद्ध सख्ती, ट्रेनिंग रद्द कर वापस भेजा गया मसूरी अकादमी..! बदले में पूजा ने पुणे डीएम पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप हरभजन, युवराज सिंह और रैना मुश्किल में, पैरा एथलीट्स का उड़ाया था मजाक..FIR दर्ज आज है विक्रम संवत् 2081 के आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि रात 08:33 बजे तक तदुपरांत एकादशी तिथि प्रारंभ यानी मंगलवार, 16 जुलाई 2024
कानून मंत्री की खरी-खरी: रिजीजू बोले- जज निर्वाचित नहीं होते इसलिए उन्हें बदला नहीं जा सकता लेकिन लोग फैसले से राय बनाते हैं

अदालत

कानून मंत्री की खरी-खरी: रिजीजू बोले- जज निर्वाचित नहीं होते इसलिए उन्हें बदला नहीं जा सकता लेकिन लोग फैसले से राय बनाते हैं

अदालत//Delhi/New Delhi :

काॅलेजियम प्रणाली को लेकर विधायिका और न्यायपालिका के बीच खिंची तलवारों के बीच केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने जजों की नियुक्ति से लेकर अपनी बात रखी। रीजीजू ने कहा कि आज सोशल मीडिया के दौर में आम नागरिक सरकार से सवाल पूछते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा होना भी चाहिए।

कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा है कि चूंकि जज निर्वाचित नहीं होते हैं, इसलिए उन्हें सार्वजनिक जांच का सामना नहीं करना पड़ता है, लेकिन लोग उन्हें देखते हैं और न्याय देने के तरीके से उनका आकलन करते हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में कॉलेजियम प्रणाली से जजों की नियुक्ति को लेकर हालिया समय में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच गतिरोध बढ़ा है। कानून मंत्री ने तीस हजारी अदालत परिसर में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में यह टिप्पणी की।

सोशल मीडिया के कारण लोग पूछते हैं सवाल
रीजीजू ने कहा कि सोशल मीडिया के कारण आम नागरिक सरकार से सवाल पूछते हैं और उन्हें ऐसा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार पर हमला किया जाता है और सवाल किया जाता है और हम इसका सामना करते हैं। 
मंत्री ने कहा, ‘अगर लोग हमें फिर से चुनते हैं, तो हम सत्ता में वापस आएंगे। अगर वे नहीं चुनते हैं, तो हम विपक्ष में बैठेंगे और सरकार से सवाल करेंगे।’ उन्होंने कहा कि दूसरी ओर यदि कोई व्यक्ति जज बनता है तो उसे चुनाव का सामना नहीं करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जजों की सार्वजनिक पड़ताल नहीं होती है।’
सीजेआई को लिखा पत्र सार्वजनिक कैसे हुआ
रिजीजू ने कहा कि मैंने सीजेआई को एक पत्र लिखा, जिसके बारे में किसी को नहीं पता था। पता नहीं किसे कहां से पता चला और खबर बना दी कि कानून मंत्री ने सीजेआई को पत्र लिखा कि कॉलेजियम में सरकार का प्रतिनिधि होना चाहिए। इस बात का कोई सर पैर नहीं। मैं कहां से उस प्रणाली में एक और व्यक्ति डाल दूंगा।
लोग फैसलों के जरिये बनाते हैं राय
कानून मंत्री ने कहा कि चूंकि लोग आपको नहीं चुनते हैं, वे आपको बदल नहीं सकते। लेकिन लोग आपको आपके फैसले, जिस तरह से आप फैसला सुनाते हैं उसके जरिए देखते हैं और आकलन करते हैं तथा राय बनाते हैं।श् उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में कुछ भी छिपा नहीं है। रीजीजू ने कहा कि प्रधान जज ने उनसे सोशल मीडिया पर जजों पर हो रहे हमलों के बारे में कुछ करने का अनुरोध किया था। वह जानना चाहते थे कि जजों के खिलाफ अपमानजनक भाषा को कैसे नियंत्रित किया जाए।
सार्वजनिक मंच पर बहस नहीं कर सकते जज
उन्होंने कहा कि जज सार्वजनिक मंच पर बहस नहीं कर सकते क्योंकि सीमाएं हैं। रीजीजू ने कहा, ‘मैंने सोचा कि क्या किया जाना चाहिए। अवमानना का प्रावधान है। लेकिन, जब लोग बड़े पैमाने पर टिप्पणी करते हैं तो क्या किया जा सकता है। जहां हम दैनिक आधार पर सार्वजनिक जांच और आलोचना का सामना करते हैं, वहीं अब न्यायाधीशों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है।’ उन्होंने दावा किया कि आजकल न्यायाधीश भी थोड़े सावधान हैं, क्योंकि अगर वे ऐसा फैसला देते हैं जिसके परिणामस्वरूप समाज में ‘व्यापक प्रतिक्रिया’ होगी, तो वे भी प्रभावित होंगे क्योंकि वे भी इंसान हैं।
 

You can share this post!

author

Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

Comments

Leave Comments