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लोकसभा चुनाव: क्या आप-कांग्रेस पार कर पाएंगे 12 फीसदी वोट का अंतर

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लोकसभा चुनाव: क्या आप-कांग्रेस पार कर पाएंगे 12 फीसदी वोट का अंतर

राजनीति//Delhi/New Delhi :

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 1 जून तक के लिए अंतरिम जमानत पर तिहाड़ जेल से बाहर आए हैं। उन्हें यह जमानत लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए दी गई है। केजरीवाल सबसे पहले कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर पहुंचे। उनके लिए बड़ी चुनौती वोटों के एक बड़े अंतर को पाटना है।

पिछले 24 घंटे से दिल्ली की सियासत दो धुरी पर घूम रही है। पहली है ‘तिहाड़ जेल’ और दूसरी है ‘हनुमान मंदिर’। तिहाड़ जेल और कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर के बीच दूरी करीब भले ही 16 किमी हो, लेकिन दिल्ली में आप-कांग्रेस को बीजेपी को सातों सीटों पर मात देने के लिए 12 फीसदी वोट के अंतर को पाटना होगा। यह अंतर जितना आसान दिख रहा है, असल में यह उतना ही जटिल है। 
हालांकि शराब घोटाला मामले में अंतरिम जमानत पर बाहर आए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की एंट्री से दिल्ली का चुनाव दिलचस्प मोड़ पर जाता नजर आ रहा है। तिहाड़ जेल से बाहर आते ही केजरीवाल ने बीजेपी पर तीखे तीर छोड़ना शुरू कर दिया है। केजरीवाल चीख-चीख कर दिल्ली की जनता को बता रहे हैं कि उन्हें मोदी सरकार ने साजिश के तहत फर्जी मामले में फंसाकर तिहाड़ जेल भेजा। केजरीवाल जनता की सहानुभूति पाना चाहते हैं। 
शनिवार को अरविंद केजरीवाल कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर पहुंचे और संकट मोचन का आशीर्वाद लेकर चुनावी रण में कूद गए। दिल्ली में लोकसभा की सभी सात सीटों पर छठे चरण में 25 मई को मतदान होना है। केजरीवाल के पास चुनाव प्रचार का वक्त बेहद कम हैं। ऐसे में केजरीवाल ने सियासी पिच पर धुआंधार बल्लेबाजी शुरू कर दी है। जेल से बाहर आने के बाद केजरीवाल ने बीजेपी पर वार करते हुए पीएम मोदी के रिटायरमेंट पर सवाल खड़ा कर दिया।
केजरीवाल ने कहा, ‘ये लोग ‘इंडिया गठबंधन से उनके चेहरे के बारे में पूछते हैं। मैं भाजपा से पूछता हूं कि उनका प्रधानमंत्री कौन होगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अगले साल 17 सितंबर को 75 साल के हो रहे हैं। उन्होंने नियम बनाया था कि 75 साल की उम्र वालों को ‘रिटायर’ कर दिया जाएगा। उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुमित्रा महाजन को रिटायर (सेवानिवृत्त) कर दिया।’ उन्होंने कहा, ‘वह (मोदी) अगले साल रिटायर हो जाएंगे। वह अमित शाह (केंद्रीय गृह मंत्री) को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मांग रहे हैं। क्या शाह मोदी जी की गारंटी पूरी करेंगे?’ 
बीजेपी के दिग्गज नेता अमित शाह और जेपी नड्डा को केजरीवाल को जवाब देने के लिए मैदान में उतरना पड़ा। दोनों ने कहा, ‘नरेंद्र मोदी ही अपना तीसरा टर्म पूरा करेंगे।’ केजरीवाल ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं कि वह हर कीमत में दिल्ली में बीजेपी की राह मुश्किल कर देंगे लेकिन ये इतना आसान नहीं है। आइए दिल्ली के 2019 के चुनावी आंकड़ों के जरिए 2024 के समीकरण समीकरण और संभावनाओं को समझते हैं।
वोटों का अंतर समझिए
- 2019 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली में सभी सात सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों को 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे।
- चांदनी चैक से बीजेपी के कैंडिडेट हर्षवर्धन को 52.94 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि कांग्रेस के जयप्रकाश अग्रवाल को 29.83 प्रतिशत और आप के पंकज कुमार गुप्ता को 14.82 फीसदी वोट मिले थे।
- पूर्वी दिल्ली में बीजेपी के कैंडिडेट गौतम गंभीर को 55.35 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली को 24.34 प्रतिशत और आप की आतिशी मार्लेना को 17.51 प्रतिशत वोट मिले थे।
- नई दिल्ली लोकसभा सीट से बीजेपी की मीनाक्षी लेखी को 54.77 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस के अजय माकन को 27.1 प्रतिशत और आप के बृजेश गोयल को 16.45 फीसदी वोट मिले थे।
- उत्तर पू्र्वी दिल्ली से बीजेपी के मनोज तिवारी को 53.9 प्रतिशत वोट मिले थे। यहां से कांग्रेस की दिग्गज नेता और दिल्ली की लगातार तीन बार सीएम रह चुकीं शीला दीक्षित को 28.95 प्रतिशत और आप के दिलीप पांडे को 13.1 प्रतिशत वोट मिले थे।
- उत्तर पश्चिम दिल्ली से बीजेपी के हंस राज हंस को 60.49 प्रतिशत वोट मिले थे। यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार राजेश लिलोठिया को 17.01 प्रतिशत जबकि आप के गगन सिंह को 21.16 प्रतिशत ही वोट मिले थे।
- दक्षिण दिल्ली में बीजेपी के रमेश बिधूड़ी को 56.58 फीसदी वोट मिले थे। इस सीट से आप कैंडिडेट राघव चड्ढा को 26.47 फीसदी वोट मिले थे जबकि दिग्गज बॉक्सर विजेंदर सिंह ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था और उन्होंने महज 13.62 प्रतिशत वोट मिले थे।
- पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी के उम्मीदवार प्रवेश वर्मा को 60.05 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि कांग्रेस के महाबल मिश्रा को 20.04 और आप के बलबीर सिंह जाखड़ को 17.58 प्रतिशत ही वोट मिल पाए थे।
बदला हुआ है राजनीतिक समीकरण
पिछले दो लोकसभा चुनावों की तुलना में इस बार का राजनीतिक समीकरण बदला हुआ है। पहले दिल्ली की सभी सातों सीटों पर भाजपा, कांग्रेस और आप के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होता था। आप व कांग्रेस के बीच मतों के विभाजन से भाजपा की राह आसान होती थी। 2014 और 2019 में लोकसभा सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष हुआ था और दोनों ही बार बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल की थी। 2019 में तो कई सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों ने 50 फीसदी से अधिक वोट पाए थे। कुछ सीटों पर आप और कुछ पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी। लेकिन, इस बार आप और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिससे स्थिति पहले जैसी नहीं दिख रही है। 2019 के नतीजों को देखें तो एक संभावना ये दिखती है कि अगर केजरीवाल के बाहर आने से कोई भी माहौल नहीं बनता, यानी कोई वोट आप के पक्ष में स्विंग नहीं होता तो सातों सीट बीजेपी ही जीत सकती है। अगर 6 फीसदी का वोट आप के पक्ष में स्विंग होता है तो इंडिया गठबंधन दो सीट दिल्ली में जीत सकती है, जबकि 5 सीट बीजेपी ही जीत पाएगी।
इस बार किस सीट से कौन-सी पार्टी का उम्मीदवार
लोकसभा सीट        बीजेपी उम्मीदवार    इंडिया गठबंधन (कांग्रेस़ आप)
नई दिल्ली        बांसुरी स्वराज        सोमनाथ भारती (आप)
चांदनी चैक        प्रवीण खंडेलवाल         जे.पी. अग्रवाल (कांग्रेस)
पूर्वी दिल्ली        हर्ष मल्होत्रा        कुलदीप कुमार (आप)
उत्तर-पूर्वी दिल्ली    मनोज तिवारी        कन्हैया कुमार (कांग्रेस)
उत्तर-पश्चिमी दिल्ली    योगेंद्र चंदोलिया        उदित राज (कांग्रेस)
पश्चिमी दिल्ली        कमलजीत शहरावत    महाबल मिश्रा (आप)
दक्षिणी दिल्ली        रामवीर सिंह बिधूड़ी    सहीराम पहलवान (आप)
इंडिया गठबंधन कैसे जीत सकता है सातों सीट?
अगर 2019 के मुकाबले 9 फीसदी वोट आप के पक्ष में मूव हो तो 5 सीट इंडिया गठबंधन के खाते में जा सकती है और दो सीट बीजेपी के पास। चुनावी आंकड़ों में चैथा विकल्प वोट शेयर के आधार पर कुछ ऐसा है कि अगर 12 फीसदी का वोट 2019 के मुकाबले इस बार आम आदमी पार्टी के पक्ष में स्विंग करे तो दिल्ली में इंडिया गठबंधन सातों सीट जीत सकता है।

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author

Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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