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काॅलेजियम विवाद में नया मोड़ः सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ ने जाहिर की आईबी और राॅ की रिपोर्ट

अदालत

काॅलेजियम विवाद में नया मोड़ः सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ ने जाहिर की आईबी और राॅ की रिपोर्ट

अदालत//Delhi/New Delhi :

जजों की नियुक्तियों को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट काॅलेजियम के बीच का विवाद एक नये मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र सरकार की आपत्तियों का विस्तार से जवाब दिया है, जिसमें रॉ व आईबी की रिपोर्ट का भी हवाला है।

केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम के बीच तकरार और बढ़ गई है। इसबीच, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ऐसा कदम उठाया है, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। अपने अप्रत्याषित कदम में सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित एक बयान में विस्तार से खुलासा किया है कि कॉलेजियम द्वारा हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्ति के लिए अनुशंसित नामों को केंद्र सरकार ने क्यों ठुकरा दिया। इस बयान में हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति से संबंधित खुफिया एजेंसी रॉ और आईबी की रिपोर्ट भी सार्वजनिक कर दी गई है, जो अपने आप में अप्रत्याशित है।
केंद्र सरकार की आपत्ति और कॉलेजियम का जवाब
रिपोर्ट के मुताबिक कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्ति के लिए एडवोकेट सौरभ कृपाल का नाम भेजा था। केंद्र सरकार ने उनके नाम को रिजेक्ट कर दिया और तर्क दिया है कि वो समलैंगिक हैं और पक्षपाती हो सकते हैं। उनका पार्टनर विदेशी है। कॉलेजियम ने इसका जवाब देते हुए कहा है कि संविधान यौन स्वतंत्रता की गारंटी देता है। सौरभ कृपाल, की नियुक्ति से दिल्ली हाईकोर्ट में डाइवर्सिटी आएगी। विदेशी पार्टनर होना, अयोग्यता का आधार नहीं हो सकता है।
इसी तरह कॉलेजियम ने मुंबई हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्ति के लिए सोमशेखर सुंदरेसन का नाम भेजा था। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का पक्ष है कि सुंदरेसन ने सोशल मीडिया पर पेंडिंग केसेज पर अपनी राय रखी थी। कॉलेजियम ने इसका जवाब देते हुए कहा है कि किसी मसले पर किसी अभ्यर्थी की राय उसके डिसक्वालीफिकेशन का कारण नहीं बन सकती है।
कॉलेजियम ने मद्रास हाईकोर्ट में नियुक्ति के लिए आर. जॉन सत्यन का नाम सुझाया। सरकार का तर्क है कि सत्यन ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पीएम नरेंद्र मोदी की आलोचना से जुड़ा एक लेख शेयर किया था। साथ ही, एक मेडिकल स्टूडेंट के सुसाइड से जुड़ा लेख भी साझा किया था। कॉलेजियम ने सरकार के इस तर्क का जवाब देते हुए कहा है कि किसी लेख को साझा करने से किसी अभ्यर्थी की योग्यता, गरिमा और कैरेक्टर पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है।
कानून मंत्रालय पर तीखी नाराजगी जताई
कॉलेजियम ने केंद्रीय कानून मंत्रालय के न्याय विभाग पर भी तीखी आपत्ति जताई है। दरअसल, कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्ति के लिए एडवोकेट अमितेश बनर्जी और शाक्य सेन का नाम सुझाया था। जो जुलाई 2019 से ही सरकार के पास पेंडिंग है।

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Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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