चीन पर टूट पड़ेगी नेक्स्ट जेनरेशन ब्रह्मोस...! मिग-मिराज में भी हो सकेगी फिट

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चीन पर टूट पड़ेगी नेक्स्ट जेनरेशन ब्रह्मोस...! मिग-मिराज में भी हो सकेगी फिट

सेना/वायुसेना/Delhi/New Delhi :

नेक्स्ट जेनरेशन ब्रह्मोस मिसाइल मिग-29, मिराज 2000 और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट जैसे प्लेटफॉर्म में फिट की जा सकेगी। इससे चीन बॉर्डर पर जमीनी हमलों को और प्रभावी बनाया जा सकेगा। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चैधरी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

एयर चीफ मार्शल ने कहा- नेक्स्ट जेनरेशन ब्रह्मोस मिसाइल स्मॉल वर्जन वाली होगी। जिसे छोटे लड़ाकू विमानों से भी छोड़ा जा सकेगा। 3 साल पहले लद्दाख में चीन के साथ हुई झड़प के बाद हमें इसकी जरूरत महसूस हुई। इसके बाद हमने इस पर काम करना शुरू कर दिया। लड़ाकू विमान सुखोई ैन्-30 पर ब्रह्मोस को अटैच करने के बाद वायुसेना की क्षमता में इजाफा हुआ है।
ब्रह्मोस मिसाइल देश का ब्रह्मास्त्र
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चैहान ने ब्रह्मोस मिसाइल को देश का ब्रह्मास्त्र बताया। उन्होंने कहा- आत्मनिर्भरता का मतलब यह नहीं है कि हम भारत में हर चीज का उत्पादन करें। हमारे जैसे डवलपिंग देश के लिए ये मुमकिन भी नहीं है। हम जॉइंट वेंचर स्थापित करने जा रहे है। ये अलग-अलग तरह के होंगे और ब्रह्मोस एयरोस्पेस एक ऐसा ही वेंचर है। देश में आज ढेरों परिवर्तन हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय परिवेश में हमारा कद बढ़ता जा रहा है। विश्व आज उम्मीदों से हमारी ओर देख रहा है।
तीनों सेनाओं के पास सुपरसोनिक मिसाइल
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल अब तक तीनों सेनाओं को मिल चुकी है। पहली सुपरसोनिक मिसाइल इंडियन नेवी को 2005, इंडियन आर्मी को 2007 और इंडियन एयरफोर्स को 2020 में मिली। अब अगले कुछ साल में भारत के पास खुद की हाइपरसोनिक मिसाइल भी होगी।
नए वॉरशिप से ब्रह्मोस का परीक्षण
इंडियन नेवी में शामिल नए वॉरशिप आईएनएस मोरमुगाओ से 13 मई को ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था। मिसाइल ने सीधा टारगेट को हिट किया था। आईएनएस मोरमुगाओ को इंडियन नेवी के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है। यह हथियारों से लैस दुनिया का सबसे आधुनिक मिसाइल करियर है।
नए बूस्टर से सटीक हमला
3 महीने पहले भी नेवी ने अरब सागर में अपने जहाज से ब्रह्मोस का सफल परीक्षण किया था। डीआरडीओ द्वारा डिजाइन किए गए बूस्टर के साथ ब्रह्मोस मिसाइल ने अरब सागर में टारगेट पर सटीक हमला किया। मिसाइल का परीक्षण बैटलशिप कोलकाता से किया गया।
सुखोई के साथ भी परीक्षण
ब्रह्मोस के साथ-साथ सुखोई की भी क्षमताओं का टेस्ट हुआ। यह फाइटर एयरक्राफ्ट एयरफोर्स के साथ नेवी की भी ताकत बना है।  इंडियन एयरफोर्स ने दिसंबर 2022 में बंगाल की खाड़ी में ब्रह्मोस एयर लॉन्च मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। यह 400 किलोमीटर तक के टारगेट को निशाना बना सकती है। वायुसेना ने अपने ऑफिशियल बयान में कहा- इस मिसाइल को सुखोई एमकेआई-30 फाइटर एयरक्राफ्ट से टेस्ट किया गया। टेस्ट के दौरान मिसाइल ने टारगेट की गई शिप को बीचोंबीच मारा। यह मिसाइल के एयर-लॉन्च वर्जन का एंटी-शिप वर्जन है।

ब्रह्मोस पर एक नजर
ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पनडुब्बी, शिप, एयरक्राफ्ट या जमीन कहीं से भी छोड़ा जा सकता है।
ब्रह्मोस रूस की ओकिंस क्रूज मिसाइल टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस मिसाइल को भारतीय सेना के तीनों अंगों, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को सौंपा जा चुका है।
ब्रह्मोस मिसाइल के कई वर्जन मौजूद हैं। ब्रह्मोस के लैंड-लॉन्च, शिप-लॉन्च, सबमरीन-लॉन्च एयर-लॉन्च वर्जन की टेस्टिंग हो चुकी है।
जमीन या समुद्र से दागे जाने पर ब्रह्मोस 290 किलोमीटर की रेंज में मैक 2 स्पीड (2500किमी/घंटे) से अपने टारगेट को नेस्तनाबूद कर सकती है।
पनडुब्बी से ब्रह्मोस मिसाइल को पानी के अंदर 40-50 मीटर की गहराई से छोड़ा जा सकता है। पनडुब्बी से ब्रह्मोस मिसाइल दागने की टेस्टिंग 2013 में हुई थी।

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Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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