अब इन परमवीरों के नाम से जानें जाएंगे अंडमान-निकोबार के 21 द्वीप...

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अब इन परमवीरों के नाम से जानें जाएंगे अंडमान-निकोबार के 21 द्वीप...

सेना//Delhi/New Delhi :

सोमवार 23 जनवरी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्मतिथि यानी पराक्रम दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के 21 सबसे बड़े द्वीपों का नामकरण किया। इन द्वीपों का नाम परमवीर चक्र से सम्मानित 21 परमवीरों के नाम पर रखा गया है।

पहले इन द्वीपों का कोई नाम नहीं था लेकिन अब ये द्वीप देश के असली नायकों के नाम से जाने जाएंगे। सबसे बड़े द्वीप का नाम पहले परमवीर के नाम पर रखा गया, दूसरे सबसे बड़े द्वीप का नाम दूसरे परमवीर के नाम पर रखा गया। इसी तरह कुल 21 द्वीपों का नाम 21 परमवीर सैनिकों के नाम पर रखा गया है
1. मेजर सोमनाथ शर्मा
मेजर सोमनाथ शर्मा देश पहले परमवीर हैं। मेजर शर्मा ने आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ लड़ते हुए शहादत दी थी। 
2. नायक जदुनाथ सिंह
नायक जदुनाथ सिंह जम्मू और कश्मीर में नौशेरा के नजदीक तैन धार में चैकी कमांडर थे। छह फरवरी 1948 को दुश्मन सैनिकों ने उनकी चैकी पर हमला बोल दिया। वह और उनकी टुकड़ी दुश्मन द्वारा लगातार किए गए तीन हमलों से अपनी चौकी को बचाने में कामयाब रहे। तीसरे हमले के अंत तक चौकी पर मौजूद 27 जवानों में से 24 जवान शहीद अथवा घायल हो चुके थे।
3. सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे
8 अप्रैल 1948 को बॉम्बे सैपर्स के सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे नौशेरा-राजौरी रोड के माइल 26 पर बारूदी सुरंगों और सड़क के अवरोधों को हटाने वाले दल की कमान संभाले हुए थे। दुश्मन ने उस क्षेत्र में भारी गोलाबारी शुरू कर दी जिसके कारण बारूदी सुरंग हटाने वाले दल के दो सदस्य वीरगति को प्राप्त हुए और पांच घायल हो गए। 
4. कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह
18 जुलाई 1948 को 6 राजपूताना राइफल्स के सी एचएम पीरू सिंह को जम्मू कश्मीर के तिथवाल में शत्रुओं द्वारा अधिकृत एक पहाड़ी पर आक्रमण कर उस पर कब्जा करने का काम सौंपा गया। हमले के दौरान उन पर एमएमजी से भारी गोलीबारी की गई और हथगोले फेंके गए। उनकी टुकड़ी के आधे से अधिक सैनिक मारे गए या घायल हो गए। इसके बावजूद पीरू सिंह ने शेष जवानों को लड़ाई जारी रखने को प्रेरित करते हुए घायल होने के बावजूद दुश्मन के एमएमजी युक्त दो बंकर बर्बाद कर दिये। 
5. लांस नायक करम सिंह
13 अक्टूबर 1948 को 1 सिख रेजीमेंट के लांस नायक करम सिंह जम्मू-कश्मीर की रिचमर गली में एक टुकड़ी की कमान संभाले थे। दुश्मन ने बंदूकों और मोर्टारों से भारी गोलाबारी करते हुए पोस्ट के सभी बंकर बर्बाद कर दिये। बुरी तरह घायल होते हुए भी लांस नायक करम सिंह एक से दूसरे बंकर में जाकर अपने साथियों की मदद करते रहे और उन्हें लड़ने के लिए प्रेरित करते रहे। दुश्मन ने उस दिन आठ बार आक्रमण किया।
6. कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया
पांच दिसंबर 1961 को 31 गोरखा राइफल्स को संयुक्त राष्ट्र संघ मिशन कार्य के दौरान एलिजाबेथविले में कटंगी सैनिकों द्वारा लगाए गए सड़क के अवरोधों को हटाने का आदेश मिला। जब कैप्टन सलारिया ने गोरखा कंपनी के साथ मिलकर अवरोध को हटाने का प्रयास किया तो उन्हें दुश्मन ने उनके दल पर स्वचालित हथियारों से भारी गोलाबारी की। कैप्टन सलारिया के सैनिकों ने दुश्मन पर संगीनों, खुखरी और हथगोलों से आक्रमण कर 40 दुश्मनों को मार डाला और उनकी दो कारों को नष्ट कर दिया। 
7. मेजर धन सिंह थापा
18 गोरखा राइफल्स के मेजर धन सिंह थापा लद्दाख में एक अग्रिम चौकी की कमान संभाले हुए थे। 20 अक्तूबर 1962 को चीन के सैनिकों ने उनकी चौकी पर तोपों और मोर्टारों से बमबारी शुरु करने के बाद भारी सैन्यबल के साथ आक्रमण कर दिया। उनके नेतृत्व में, दुश्मनों की तुलना में बहुत कम संख्या में होते हुए भी भारतीय सैनिकों ने आक्रमण को नाकाम कर दिया और दुश्मनों को भारी क्षति पहुंचाई। दुश्मन ने दूसरी बार आक्रमण किया और इस बार भी उनका हमला विफल रहा। 
8. सूबेदार जोगिंदर सिंह
23 अक्तूबर 1962 भारत-चीन युद्ध के दौरान सूबेदार जोगिन्दर सिंह की 1 सिख बटालियन की प्लाटून ने बूमला, अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के दो आक्रमणों को विफल कर दिया। उनकी प्लाटून के तब तक आधे जवान शहीद हो चुके थे और सूबेदार जोगिन्दर सिंह बुरी तरह घायल। तीसरे आक्रमण पर भी उनके नेतृत्व में उनकी प्लाटून अपने स्थान पर ही डटी रही। सूबेदार जोगिन्दर ने खुद एक मशीन गन संभाली और गोला-बारूद समाप्त होने से पूर्व  तक अनेक दुश्मन सैनिकों को मार गिराया।

9. मेजर शैतान सिंह
मेजर शैतान सिंह जम्मू कश्मीर के लद्दाख सेक्टर में लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर रेजांग ला में कुमाऊं रेजिमेंट की तेरहवीं बटालियन की एक कंपनी की कमान संभाले हुए थे। 18 नवंबर 1962 को बहुत बड़ी संख्या मे चीनी सैनिकों ने उनके ठिकाने पर जबरदस्त हमला किया। मेजर शैतान सिंह इस ऑपरेशन के दौरान पूरी तरह हावी रहे और निजी खतरा उठाते हुए एक प्लाटून पोस्ट से दूसरे तक जाकर अपने सैनिकों का मनोबल बनाए रखा। 
10. लेफ्टिनेंट कर्नल एबी तारापोर
लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशीर बुरजोरजी तारापोर 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान सियालकोट सेक्टर में पूना हॉर्स रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे। 11 सितंबर 1965 को 17 पूना हॉर्स पर दुश्मन के बख्तरबंद टैंको से जवाबी हमला किया गया। रेजिमेंट ने शत्रु हमले को नाकाम कर वीरतापूर्वक फिल्लौरा पर आक्रमण कर दिया। घायल होने के बावजूद ले.क. तारापोर ने सुरक्षित स्थान ना जाते हुए  वजीरवाली, जसोरन तथा बुतुर-डोगरांडी पर कब्जा करने में अपनी रेजिमेंट का नेतृत्व किया।
11. सी क्यू एम एच अब्दुल हमीद
सीक्यूएमएच अब्दुल हमीद 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खेमकरन सेक्टर में चौथी ग्रेनेडियर्स में सेवारत थे। 10 सितंबर 1965 को पाकिस्तानी सेना ने पैटन टैंकों के साथ खेमकरन सेक्टर पर हमला कर दिया। एक जीप पर लगी आरसीएलगन टुकड़ी की कमान संभाले अब्दुल हमीद बगल में पोजीशन लेते हुए भीषण गोलाबारी के बीच दुश्मन के अग्रिम टैंक और फिर दूसरे टैंक को भी नष्ट कर दिया। तब तक वे दुश्मन के टैंकों की नजर में आ चुके थे और उनकी जीप पर भीषण गोलीबारी होने लगी।
12. लांस नायक अलबर्ट एक्का 
1971 के भारत-पाक युद्ध में गंगासागर मे दुश्मन के प्रतिरक्षा ठिकानों पर आक्रमण के दौरान लांस नायक अलबर्ट एक्का चैदहवीं गार्ड्स की अग्रिम कंपनी में तैनात थे। चार दिसंबर 1971 को लांस नायक एक्का ने देखा कि दुश्मन की मशीनगन की गोलीबारी से उनकी कंपनी को बहुत नुकसान हो रहा है। अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की पूरी तरह उपेक्षा करते हुए उन्होंने दुश्मन के बंकर पर धावा बोल दिया और दो दुश्मन सैनिकों को ढेर कर दिया। अचानक एक इमारत से मीडियम मशीनगन से गोलीबारी होने लगी। बुरी तरह जख्मी होने के बावजूद वह रेंगते हुए आगे बढ़े और हथगोला फेंककर एक सैनिक को मार डाला।
13. फ्लाइंग अफसर निर्मल जीत सिंह सेखों
14 दिसंबर 1971 को भारत-पाक युद्ध के दौरान दुश्मन के छह सेबर वायुयानों ने श्रीनगर एअरफील्ड पर भारी गोलाबारी की। आक्रमण के दौरान उड़ान भरने के प्रयास में अपनी जान जोखिम मे डाल कर 18वीं स्क्वाड्रन के फ्लाइंग अफसर निर्मल जीत सिंह सेखों, जो एक लड़ाकू विमान पायलट थे, ने उड़ान भरी और दो आक्रमणकारी सेबर लड़ाकू जहाजों से भिड़ गए। उन्होंने एक विमान पर अविश्वसनीय कुशलता दिखाते हुए प्रहार किया और दूसरे विमान को क्षतिग्रस्त कर दिया। 
14. मेजर होशियार सिंह
15 दिसंबर 1971 को भारत-पाक युद्ध के दौरान मेजर होशियार सिंह तीसरी ग्रेनेडियर्स की एक कंपनी की कमान संभाले हुए थे और उन्हें जरपाल में दुश्मन के एक ठिकाने पर कब्जा करने का आदेश मिला। हमले के दौरान उनकी कंपनी पर भीषण गोलाबारी हुई। उन्होंने निडरता से हमले का नेतृत्व किया और एक भयानक मुठभेड़ के बाद लक्षित ठिकाने पर कब्जा कर लिया। दुश्मन ने जवाबी कार्रवाई मे एक के बाद एक कई आक्रमण किए। 
15. सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल
16 दिसंबर 1971 को भारत-पाक युद्ध के दौरान पूना हॉर्स ‘ए’ स्क्वाड्रन के सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल मदद के आकस्मिक आव्हान पर शकरगढ़ सेक्टर में ‘बी’ स्क्वाड्रन की मदद के लिए बढ़े। मजबूत ठिकानों और आर सी एल गन वाले मोर्चों से उनके टैंको पर भारी गोलाबारी की गई। दुश्मन के आक्रमण को विफल करते हुए वे ‘बी’ स्क्वाड्रन के पास पहुंचे और दुश्मन के साथ घमासान युद्ध में शामिल हो गए।
16. नायब सूबेदार बाना सिंह
26 जून 1987 को जम्मू-कश्मीर लाइट इंफेंट्री की 8वीं बटालियन के नायब सूबेदार बाना सिंह स्वेच्छा से उस कार्यबल में शामिल हुए जिसे 21,000 फीट की ऊंचाई पर सियाचिन ग्लेशियर में पाक सेना से चौकी को छुड़ाने का कार्य सौंपा गया था। बाना सिंह व जवानों ने शून्य दृश्यता में जोखिमपूर्ण मार्ग से बर्फ की 457 मीटर ऊंची दीवार पर चढ़ हथगोलों से दुश्मन के बंकर को ध्वस्त किया व  संगीनों के साथ आक्रमण किया और कुछ पाकिस्तानी सैनिकों को मारे गये और कुछ ने चोटी से छलांग लगा ली।

17. मेजर रामास्वामी परमेश्वरन
25 नवंबर 1987 को ऑपरेशन पवन के दौरान जब महार रेजिमेंट की आठवीं बटालियन के मेजर रामास्वामी परमेश्वरन श्रीलंका में एक तलाशी अभियान से लौट रहे थे। इसी दौरान परमेश्वरन के सैन्य दल पर आतंकवादियों ने घात लगाकरआक्रमण किया। धैर्य और सूझ-बूझ से उन्होंने आतंकवादियों को पीछे से घेरा और उन पर हमला कर दिया जिससे आतंकी पूरी तरह से स्तब्ध रह गए। आमने-सामने की लड़ाई में एक आतंकवादी ने उनके सीने में गोली मार दी।
18. लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे
ऑपरेशन विजय के दौरान 11 गोरखा राइफल्स की पहली बटालियन के ले.मनोज कुमार पांडे को जम्मू-कश्मीर के बटालिक में खालूबार रिज को दुश्मनों से खाली कराने का काम सौंपा गया। तीन जुलाई 1999 को उनकी कंपनी जैसै ही आगे बढ़ी दुश्मन ने उन पर भारी गोलाबारी हुई। उन्होंने निडरता से दुश्मन पर आक्रमण कर 4 सैनिकों को मारा व दो बंकर तबाह कर दिए। कंधे व पैरों में जख्म के बावजूद वे पहले बंकर तक पहुंचे और भीषण मुठभेड़ में दो अन्य सैनिकों को मारकर बंकर खाली करा दिया।

19. ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव

ऑपरेशन विजय के दौरान 18वीं ग्रेनेडियर्स के ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव घातक प्लाटून के सदस्य थे। इस प्लाटून को जम्मू कश्मीर के द्रास में टाइगर हिल टॉप पर कब्जा करने का काम सौंपा गया था। तीन जुलाई 1999 को दुश्मन की भारी गोलाबारी के बीच अपनी टीम के साथ योगेंद्र ने बर्फीली खड़ी चट्टान पर चढ़ाई की और वहां स्थित बंकर को ध्वस्त कर दिया जिससे प्लाटून उस खड़ी चट्टान पर चढ़ने में कामयाब हो गई। 
20. राइफलमैन संजय कुमार
ऑपरेशन विजय में राइफलमैन संजय कुमार चार जुलाई 1999 को जम्मू-कश्मीर की मुशकोह घाटी में खड़ी चट्टान क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए प्रमुख स्काउट थे। चट्टान पर चढ़ने के बाद, वह एक बंकर से दुश्मन की गोलाबारी की चपेट में आ गए। आमने-सामने की लड़ाई में, उन्होंने तीन घुसपैठियों को मार गिराया और खुद गंभीर रूप से घायल हो गए। 
21. कैप्टन विक्रम बत्रा
ऑपरेशन विजय के दौरान 13 जैक राइफल्स के कैप्टन विक्रम बत्रा को प्वाइंट 5140 पर कब्जा करने का कार्य सौंपा गया। दस्ते का नेतृत्व करते हुए उन्होंने आमने-सामने की लड़ाई मे 4 शत्रु सैनिकों मारा। फिर 7 जुलाई 1999 को उनकी कंपनी को प्वाइंट 4875 पर कब्जा करने का कार्य मिला जिसमें भीषण मुठभेड़ में उन्होंने पांच शत्रु सैनिकों को मार गिराया।

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author

Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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