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वायनाड से चुनाव लड़ेंगी प्रियंका... राहुल छोड़ेंगे दक्षिण की सीट!

राजनीति

वायनाड से चुनाव लड़ेंगी प्रियंका... राहुल छोड़ेंगे दक्षिण की सीट!

राजनीति/कांग्रेस/Delhi/New Delhi :

प्रियंका गांधी वाड्रा करीब डेढ़ दशक तक सक्रिय राजनीति में उतरने से कतराती रहीं। वह लंबे समय तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कामकाज देखती रही हैं। इस दौरान वह रायबरेली में अपनी मां सोनिया गांधी और अमेठी में अपने भाई राहुल के चुनाव अभियानों में सहायक की भूमिका में रहीं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा चुनावी राजनीति में पहली बार एंट्री करने जा रही हैं। पार्टी ने तय किया है कि राहुल गांधी वायनाड लोकसभा सीट छोड़ेंगे और प्रियंका वहां होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस की आधिकारिक प्रत्याशी होंगी। वहीं, राहुल रायबरेली से सांसद बने रहेंगे। बता दें कि उन्होंने इस बार के लोकसभा चुनावों में रायबरेली और वायनाड से इलेक्शन लड़ा था और दोनों ही सीटों पर भारी वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। पिछले लोकसभा चुनाव में भी वह दो सीटों से लड़े थे, लेकिन अमेठी में उन्हें स्मृति ईरानी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। वह 2019 में वायनाड से जीतकर संसद पहुंचे थे।
जहां तक प्रियंका गांधी की बात है तो वह अपने अब तक के राजनीतिक सफर में पहली बार चुनाव लड़ेंगी। इससे पहले वह पार्टी संगठन में ही काम करती रही हैं। वह वर्तमान में कांग्रेस वर्किंग कमिटी की सदस्य भी हैं। प्रियंका 2004 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रचार अभियान में शामिल रहीं। यह राजनीति में उनका पहला मजबूत कदम था। उन्होंने दर्जनों संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में रैलियां कीं। 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में, जब राहुल गांधी ने कांग्रेस के लिए राज्यव्यापी प्रचार अभियान का जिम्मा संभाला, प्रियंका ने अमेठी-रायबरेली क्षेत्र की 10 सीटों पर अपना ध्यान केंद्रित किया। 
डेढ़ दशक तक राजनीति से दूर रहीं 
प्रियंका गांधी वाड्रा करीब डेढ़ दशक तक सक्रिय राजनीति में उतरने से कतराती रहीं। वह लंबे समय तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कामकाज देखती रही हैं। इस दौरान वह रायबरेली में अपनी मां सोनिया गांधी और अमेठी में अपने भाई राहुल के चुनाव अभियानों में सहायक की भूमिका में रहीं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सपा के साथ गठबंधन में विधानसभा का चुनाव लड़ा था। तब दो लड़कों (अखिलेश और राहुल) को साथ लाने में प्रियंका गांधी ने ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। चुनाव कैम्पेन में अखिलेश यादव और राहुल गांधी को लेकर ‘यूपी को ये साथ पसंद है’ का नारा खूब दिया गया लेकिन यह गठबंधन बुरी तरह फ्लॉप साबित हुआ था। 
यूपी में चला प्रियंका का दांव
लोकसभा चुनाव 2024 में भी यूपी में सपा को इंडिया गठबंधन में शामिल कराने में प्रियंका गांधी की भूमिका अहम रही। सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 लोकसभा सीटें जीतीं। प्रियंका ने औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति में तब एंट्री की जब उन्हें 23 जनवरी, 2019 को उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से के लिए कांग्रेस पार्टी का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया। 11 सितंबर, 2020 को उन्हें पूरे उत्तर प्रदेश का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया गया। 
ज्यादातर समय उत्तर प्रदेश में रहीं
अक्टूबर 2021 में, प्रियंका गांधी को यूपी पुलिस ने दो बार हिरासत में लिया। पहली बार वह लखीमपुर खीरी जाने के दौरान हिरासत में ली गईं, जहां कुछ प्रदर्शनकारी किसान केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे के काफिले की गाड़ी चढ़ने से मारे गए थे। उन्हें और पार्टी के कई अन्य नेताओं को सीतापुर के एक पीएसी गेस्ट हाउस में 50 घंटे तक हिरासत में रखा गया था। दूसरी बार यूपी पुलिस ने उन्हें सीआरपीसी की धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए आगरा जाते वक्त हिरासत में लिया था, जब वह एक व्यक्ति के परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए आगरा जा रही थीं, जिनकी कथित तौर पर पुलिस हिरासत में मृत्यु हो गई थी।
प्रियंका के नेतृत्व में कांग्रेस ने लड़ा 2022 का यूपी चुनाव
कांग्रेस ने उनके ही नेतृत्व में 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ा। जनवरी 2022 में, प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने भाई राहुल गांधी के साथ 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का घोषणापत्र लॉन्च किया। घोषणापत्र राज्य के विकास के साथ-साथ युवाओं और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित था, और इसमें 40ः टिकट महिलाओं को देने का भी वादा किया गया था। महिला वोटों और राजनीति में उनकी भागीदारी पर जोर देते हुए उन्होंने राज्य में ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान की शुरुआत की। उत्तर प्रदेश में पार्टी को पुनर्जीवित करने के उनके सभी प्रयासों के बावजूद, कांग्रेस पार्टी को 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा। वह 403 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 2 सीटें जीत सकी। 
प्रियंका गांधी का व्यक्तिगत जीवन
प्रियंका गांधी भारत की राजनीति में प्रभाव रखने वाले नेहरू-गांधी परिवार की सदस्य हैं। वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी की बेटी, राहुल गांधी की बहन और फिरोज और इंदिरा गांधी की पोती हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू उनके नाना थे। प्रियंका का जन्म 12 जनवरी 1972 को हुआ था। वह राजीव गांधी फाउंडेशन की ट्रस्टी भी हैं। उन्होंने 1997 में व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा से शादी की। दोनों के दो बच्चे हैं- एक बेटा और एक बेटी। प्रियंका गांधी ने 1984 तक अपनी स्कूली शिक्षा देहरादून के वेल्हम गर्ल्स स्कूल में की। इसके बाद, सुरक्षा कारणों से राहुल और प्रियंका दोनों को दिल्ली के डे स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, लगातार आतंकी धमकियों के कारण, उन्हें और उनके भाई राहुल दोनों को घर पर ही शिक्षा दी गई। बाद में उन्होंने दिल्ली के कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से पढ़ाई की। प्रियंका ने दिल्ली विश्वविद्यालय के जीसस एंड मैरी कॉलेज से मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और बाद में 2010 में बुद्धिस्ट स्टडीज में मास्टर डिग्री प्राप्त की।

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Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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