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किसी भी धीमे जहर से कम नहीं है आरओ वॉटर..!

स्वास्थ्य

किसी भी धीमे जहर से कम नहीं है आरओ वॉटर..!

स्वास्थ्य //Madhya Pradesh/Indore :

पूरे भारत में लगभग सभी सार्वजनिक स्थानों पर सर्वत्र RO वाटर का साम्राज्य है। चाहे शासकीय शिक्षण संस्थान हों, चाहे रेलवे स्टेशन हों चाहे बस अड्डें हों चाहे एयर पोर्ट हों  या  चाहे शासकीय कार्यालय हों । हर जगह आरओ का पानी पीने का प्रचलन हो चुका है। यही नहीं  विश्वविद्यालयों के गेस्ट हाउस,  होटल्सपिकनिक स्थलों के पीजी या स्टे हाउसेज में भी आरओ वाटर मशीनें लग चुकी है।

विज्ञापनों की आक्रामकता से भ्रमित होकर आरओ वाटर के उपकरण आम नागरिक धड़ल्ले से खरीद रहे हैं। स्वास्थ्य और अनुसंधानों के लिए तैनात संस्थाओं की निष्क्रियता ही इस मामले में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से जिम्मेदार कही जा सकती हैं।

देख लो आरओ वॉटर की कहानी

यानी भारत के नागरिक कैंसर के सीधे निशाने पर है और जानी मानी हस्तियाँ आरो वाटर का प्रचार कर रही हैं तथा नेशनल मेडिकल कमीशन, आईसीएमआर, केन्द्रीय और राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रालय तथा अन्यान्य अनुसंधान केंद्र पता नहीं अनभिज्ञ हैं या और कुछ हैं I

  • Neutral pH is defined as 7.00, but RO water typically shows a pH of between 5.00 and 6.00. .....Given that the pH scale, like the Richter scale for earthquakes, is logarithmic, that means that pH 5.00 water is actually 100 times as acidic as pH7.00 water.

  • Drinking water pH is around 7.5 or standard is 6.5 to 7.5. This standard water pH range is slightly acidic and alkaline but not harmful as the body is on the alkaline side.
  • चाहे नोबेल विजेता डॉ. ओटो वारबर्ग ने लाख कहा हो कि कोशिका के स्तर पर एसिडिटी होने से प्राणवायु की कमी होने से कैंसर होता है तथा इसी के चलते उन्हें नोबेल प्राइज दे दिया गया हो I
  • In fact, in 1931, Dr. Otto Warburg won the Nobel Prize for discovering the cause of cancer. In essence, he said it was caused by a lack of cellular oxygenation due to acidosis in the body.
  • Cancer cells thrive in acidity (low pH), but not in alkalinity (high pH), so a diet high in alkaline foods like fruits and vegetables that also limits acidic foods, such as those from animal products, will raise blood pH levels and create an environment in the body that discourages cancer growth.
  • The water is demineralized, causes gastrointestinal problems, bone density issues, joint conditions, and cardiovascular disease.
  • The water is usually acidic. range of 5.0 to 6.0 pH. acidosis in the body is considered an underlying cause of most degenerative diseases, low mineral water increased diuresis (the production of urine by the kidneys) 20% on average and markedly increased the elimination of sodium, potassium, chloride, calcium and magnesium ions from the body.
  • Some critical contaminants are not removed., does NOT remove volatile organic chemical (VOCs), chlorine and chloramines, pharmaceuticals, and a host of other synthetic chemicals found in municipal water.
  • If that is not possible or too costly, you could add liquid ionic minerals, such as Trace Minerals Ionic Tonic, to your R.O. drinking water. However, doing so will not be as beneficial as drinking water that contains minerals naturally, but it will help somewhat with the acid-alkaline balance in the body.

  •  चाहे भारत में कैंसर का प्रकोप भयावह और प्राणघाती रूप ले चुका हो I
  • चाहे WHO ने चेतावनी दी हो कि RO वाटर बहुत घातक है I After analyzing hundreds of scientific studies concerning demineralized or reverse osmosis water, the World Health Organization released a report stating that such water "has a definite adverse influence on the animal and human organism."
  • "It has been adequately demonstrated that consuming water of low mineral content has a negative effect on homeostasis mechanisms, compromising the mineral and water metabolism in the body." Consumption of reverse osmosis water "leads to the dilution of the electrolytes dissolved in the body water. Inadequate body water redistribution between compartments may compromise the function of vital organs. Side effects at the very beginning of this condition include tiredness, weakness and headache; more severe symptoms are muscular cramps and impaired heart rate."
  • चाहे चीनी शोधकर्ताओं ने बताया हो कि The distinctive metabolic mode of solid tumors leads to acidity in the tumor microenvironment, which results in the activation of multiple factors contributing to tumor development. The most direct method to conquer the acidity is neutralization.
  • चाहे विज्ञान चीख-चीख कर कह रहा हो कि अम्लीयता विभिन्न अंगों के स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुआयामी प्रकारों से घातक है I

  • PH_Scale_How_to_Measure_Your_Body_pH_Level_Acidic_Alcaline_What_is_Normal_Human_Body_pH_Value_Acidosis_vs_Alkalosis

चाहे वैज्ञानिक कह रहे हों कि शरीर के अधिकाँश अंगों में तनिक क्षारीयता होती है, जो कि उन अंगों की सम्यक फंक्शनिंग के लिए आवश्यक है।

  • चाहे हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका, अंग-प्रत्यंगों को सतत, चौबीसों घण्टें प्राणवायु और पोषण का दान देने वाला निरंतर प्रवाहमान रक्त अम्लीय नहीं क्षारीय है I

  • चाहे देश के अधिकाँश नागरिक [यहाँ तक कि मेडिकल स्टूडेंट्स भी] सही तरीके से यानी पेट से [एब्डोमिनल] साँस न लेने के कारण, उथली सांस लेते हैं यानी पर्याप्त प्राणवायु से लगभग वंचित रहते हैं, यानी डॉ. ओटो वारबर्ग के सिद्धांत के तहत अधिकाँश नागरिक कोशिका स्तर पर प्राणवायु की कमी से जूझ रहे हैं I Proper breathing starts in the nose and then moves to the stomach as your diaphragm contracts, the belly expands and your lungs fill with air. "It is the most efficient way to breathe, as it pulls down on the lungs, creating negative pressure in the chest, resulting in air flowing into your lungs."

सभी जिम्मेदार राजनेता, केन्द्रीय और राज्य स्तरीय स्वास्थ्य मंत्री एवं अधिकारी, वैज्ञानिक, पत्रकार, स्वास्थ्य सचेतक, चिकित्सक, चिकित्सा विज्ञानी, समाजशास्त्री, मानवतावादी, विज्ञापनों पर नजर रखने वाले [यदि ऐसा कदाचित प्रावधान हो तो] सरकारी अधिकारी तथा अन्यान्य लोग ध्यान दें और गम्भीरता से संज्ञान लेने का अनुग्रह करें I आम नागरिकों को सचेत किया जाए कि कैंसर से बचना है तो भोजन में 80% ऐसे खाद्यों का उपयोग करें, जो क्षारीय हों, एसिडिक और क्षारीय भोजनों की सूची जारी की जाए, जनता को सही तरीकें से सांस लेना सिखाया जाए, गहरी सांस अथवा प्राणायाम की आवश्यकता को रेखांकित किया जाए, आरो पानी और मटके के पानी की गुणवत्ता के तुलनात्मक ज्ञान के विषय में जनता को सजग किया जाए I विभिन्न अनाज, दूध-दही, विभिन्न फलों-सब्जियों, फास्टफूड, जंकफूड, चिप्स, पास्ता, नूडल्स, पिज्जा, अचार, चाय, कॉफी, शराब, मांस, अंडे, मछली आदि सभी की अम्लीयता-क्षारीयता के विषय में विज्ञापनों, आलेखों आदि द्वारा सचेत किया जाना चाहिए I

ये सभी जानकारियाँ सन्दर्भों सहित हैं अथवा वैज्ञानिक हैं अथवा गूगल पर उपलब्ध हैं I  विनम्र अपेक्षा है कि आवश्यक कार्रवाई होगी I

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डॉ मनोहर भंडारी

By News Thikhana

डॉ. मनोहर भंडारी ने शासकीय मेडिकल कॉलेज, इन्दौर में लंबे समय तक अध्यापन कार्य किया है। वे चिकित्सा के अलावा भी विभिन्न विषयों पर निरंतर लिखते रहते है।

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