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तो अपने अस्तित्व का चुनाव लड़ रहे हैं शरद पवार और उद्धव ठाकरे..!

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तो अपने अस्तित्व का चुनाव लड़ रहे हैं शरद पवार और उद्धव ठाकरे..!

राजनीति//Maharashtra/Mumbai :

दिन पर दिन गरमी भी बढ़ती जा है तो लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी। विभिन्न राजनीतिक दल तरह-तरह के वायदे कर रहे हैं लेकिन कुछ राजनीतिक की परेशानी यह है कि प्रत्याशियों के मैदान में उतारने को लेकर उनकी आपस में टकराहट भी बढ़ गयी है।

ये लोकसभा कुछ राजनीतिक दल के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गये हैं क्योंकि उन्हें अपने अस्तित्व की लड़ाई के लिए लड़ना पड़ रहा है। महाराष्ट्र की दो प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों के नेता शरद पवार और उद्धव ठाकरे अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ते ही दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं लोकसभा चुनाव महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख अजित पवार के लिए भी परीक्षा के समान है, जिन्होंने अपने ही दलों में तोड़फोड़ की और भारतीय जनता पार्टी नीत गठबंधन में शामिल हो गए। लेकिन उद्धव ठाकरे और शरद पवार के लिए चुनौती अधिक बड़ी है क्योंकि वे फिलहाल सत्ता से बाहर हैं और उन्होंने अपने-अपने दलों शिवसेना तथा एनसीपी का मूल नाम और चुनाव चिह्न भी गंवा दिया है।

उल्लेखनीय है कि निर्वाचन आयोग और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष ने अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को असली एनसीपी और एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना कि दोनों नेताओं को चुनाव में प्रभावशाली प्रदर्शन करने की जरूरत है, अन्यथा उनके राजनीतिक अस्तित्व के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि महाराष्ट्र में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों तक अपने समूह को एकजुट रखने के लिए उद्धव ठाकरे के लिए जरूरी है कि लोकसभा चुनाव में उनके कम से कम छह-सात उम्मीदवार तो यह जरूर चुनाव जीतें।

इसी तरह ठाकरे को उतनी ही लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ना है जितनी सीट पर उनकी पार्टी ने तब चुनाव लड़ा था जब वह 2019 में भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी थी। इस बीच उद्धव ठाकरे ने अब तक 21 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर ऐसा ही किया है जबकि कांग्रेस इनमें से कुछ सीट पर दावा कर रही थी।

महाविकास आघाडी (एमवीए) में शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे के तहत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) 10 लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि शरद पवार के लिए अहम सीट उनके गृह क्षेत्र बारामती की है जहां उनकी बेटी और तीन बार की सांसद सुप्रिया सुले को अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार से चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। अगर शरद पवार बारामती हार गए तो उनका सब कुछ खत्म हो जाएगा। यह उनके और उनके भतीजे अजित के बीच की लड़ाई है। शरद पवार भी पुणे जिले (जहां बारामती निर्वाचन क्षेत्र है) में अपने पुराने प्रतिद्वंद्वियों से संपर्क कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी बेटी की राह आसान हो। इसी तरह दलित नेता प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के साथ एमवीए की सीट-बंटवारे की बातचीत विफल हो गई जिसके बाद एमवीए और ‘महायुति’ गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। इससे सत्तारूढ़ गठबंधन को फायदा होगा।

यह लोकसभा चुनाव शरद पवार और उद्धव ठाकरे के इस दावे का भी इम्तिहान है कि उनके संबंधित दलों के पारंपरिक मतदाता और कैडर उनके प्रति वफादार हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं में भी सब कुछ ठीक नहीं है और यह देखना होगा कि क्या वे अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के उम्मीदवारों के लिए पूरे दिल से काम करते या नहीं। राजनीतिक दलों में फूट कोई नई बात नहीं है लेकिन विभाजन के बाद पहली बार विद्रोहियों ने मूल दलों पर कब्ज़ा कर लिया और उन्हें मान्यता मिल गई।

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