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सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को लगाई कड़ी फटकार.. दो अन्य आरआरटीएस परियोजना का बकाया भुगतान 10 दिन में करने के निर्देश दिये

अदालत

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को लगाई कड़ी फटकार.. दो अन्य आरआरटीएस परियोजना का बकाया भुगतान 10 दिन में करने के निर्देश दिये

अदालत//Delhi/New Delhi :

आखिरकार दिल्ली सरकार को दिल्ली-मेरठ RRTS परियोजना के लिए 415 करोड़ रुपये जारी करने ही पड़ गये। लेकिन, उसकी ओर से अभी तक दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर के लिए अपने अपने हिस्से का बकाया का भुगतान नहीं किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में दिल्ली सरकार को दिसंबर तक बकाया चुकाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि आरआरटीएस परियोजना के भुगतान के लिए आर्म ट्विस्टिंग यानी ' बांह मरोड़े' जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस संजय किशन कौल और सुधांशु धूलिया की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि RRTS प्रोजेक्ट के लिए बकाया राशि का भुगतान करने के लिए 21 नवंबर को पारित उसके अंतिम आदेश का केवल आंशिक रूप से ही पालन किया गया है। अदालत ने दिल्ली सरकार को आरआरटीएस की अन्य दो परोजनाओं के लिए भुगतान जारी करने के लिए 10 दिन का समय दिया है।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली-एनसीआर में वाहन से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए RRTS परियोजना के लिए दिल्ली सरकार द्वारा अपने हिस्से का बकाया जारी करने के वादे का उल्लंघन करने पर सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ी आपत्ति व्यक्त की। अदालत ने निर्देश दिया था कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो उसके विज्ञापन बजट से बकाया राशि आरआरटीएस में ट्रांसफर कर दी जाएगी। अदालत ने निर्देश दिया कि प्रोजेक्ट के बुनियादी ढांचे के काम के लिए 415 करोड़ रुपये की बकाया राशि जारी करें।
मामले की सुनवाई की शुरुआत में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एएनएस नाडकर्णी ने पीठ को बताया कि दिल्ली सरकार ने पिछले आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। उनकी याचिका का समर्थन वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने किया, जो न्याय मित्र के रूप में अदालत की सहायता कर रही हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने बकाया भुगतान राशि जारी करने के लिए 7 दिसंबर की समय सीमा तय करते हुए कहा, 'आपको पेमेंट करने के लिए हाथ-पैर मारने की जरूरत क्यों है? आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? जब आप विज्ञापनों के लिए 540 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटन कर सकते हैं तो आप परियोजनाओं के लिए बजट क्यों नहीं बनाते। आपको भुगतान करना होगा।'
उल्लेखनीय है कि दिल्ली को मेरठ, अलवर और पानीपत से जोड़ने के लिए तीन आरआरटीएस परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है। दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर 24 स्टेशनों के साथ 82 किमी लंबा है और सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक की दूरी 60 मिनट में तय करेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार दिल्ली सरकार से आरआरटीएस परियोजना में देरी न करने की अपील करते हुए कहा है कि यह एक महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजना है जो एनसीआर में प्रदूषण संकट से निपटने के लिए जरूरी है। उच्चतम न्यायालय ने ये भी कहा कि जब राज्य सरकार प्रचार के लिए 1,100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर सकती है तो सरकार परियोजना के लिए धन की कमी का दावा नहीं कर सकती है।
अदालत ने जुलाई में दिल्ली सरकार के विज्ञापन खर्च की जानकारी मांगी थी और तभी बताया गया था कि उसने पिछले तीन सालों में विज्ञापनों पर लगभग 1,073 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में 296.9 करोड़ रुपये, 2021-22 में 580 करोड़ रुपये और 2022-23 में 196.4 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च किये थे।

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