आज है विक्रम संवत् 2081 के आषाढ़ माह पूर्णिमा तिथि दोपहर 03:46 तक बजे तक यानी रविवार, 21 जुलाई 2024
तेजस: आकार में छोटा, लेकिन मारक... भारतीय वायुसेना को अब चाहिए इतने तेजस फाइटर जेट्स 

सेना

तेजस: आकार में छोटा, लेकिन मारक... भारतीय वायुसेना को अब चाहिए इतने तेजस फाइटर जेट्स 

सेना/वायुसेना/Delhi/New Delhi :

भारतीय वायुसेना को 180 तेजस फाइटर जेट्स की जरूरत है। 83 एलसीए मार्क 1-ए के लिए कॉन्ट्रैक्ट हो चुका है। 97 और फाइटर जेट्स वायुसेना और लेगी। 

इंडियन एयरफोर्स मार्क 1ए से पहले 123 तेजस फाइटर जेट मांगे थे, जिसमें से करीब 30 जेट्स की डिलिवरी हो चुकी है। इसके बाद बाकी 83 फाइटर जेट्स तेजस मार्क-1ए होंगे, जो 2024 से 2028 के बीच मिलेंगे। 
फिलहाल तेजस फाइटर जेट के दो स्क्वॉड्रन हैं। एक का नाम फ्लाइंग डैगर्स और दूसरे का फ्लाइंग बुलेट्स। तेजस की कॉम्बैट रेंज 500 किमी है। यानी हथियारों से लैस होकर दुश्मन के इलाके में जाकर हमला करके वापस आना। यानी क्लोज-एयर-टू-ग्राउंड ऑपरेशन में मददगार। 
छोटा आकार, तेज रफ्तार
तेजस फाइटर जेट का आकार छोटा है इसलिए इस समय दुनिया का कोई भी रडार सिस्टम इसे फाइटर जेट की श्रेणी में रखता ही नहीं। इसलिए यह दुश्मन की रडार में पकड़ नहीं आएगा। यानी हमला करना आसान है। इसकी लंबाई 43.4 फीट, ऊंचाई 14.5 फीट और विंगस्पैन 26.11 फीट है। 
ध्वनि की गति से तेज
तेजस में 2458 किग्रा फ्यूल आता है। अधिकतम स्पीड 1980 किमी प्रतिघंटा है। यानी ध्वनि की गति से डेढ़ गुना ज्यादा। कुल रेंज 1850 किमी है। अधिकतम 53 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। एलसीए तेजस का कॉकपिट कांच का है, जिससे पायलट को चारों तरफ देखने में आसानी होती है। 
मल्टी रोल फाइटर जेट
छोटा और मल्टी-रोल सुपरसोनिक फाइटर एयरक्राफ्ट है। दुनियाभर के अन्य विमानों से सस्ता है। इसमें क्वाडरूप्लेक्स फ्लाइ बाय वायर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम हैं। यानी पायलटों को उड़ाने में ज्यादा सहूलियत मिलती है। 
आठ हार्ड प्वाॅइंटस
इसमें आठ हार्डप्वाइंट्स हैं। यानी आठ अलग-अलग तरह के हथियार लगा सकते हैं। इसमें एस-8 रॉकेट्स के पॉड्स लगा सकते हैं। हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें आर-73, आई-डरबी, पाइथन-5 लगे हैं। भविष्य में एएसआरएएएम, अस्त्र मार्क 1 और आर-77 की प्लानिंग भी है। 
मिसाइलों का खजाना
हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें केएच-59एमई, केएच-59एल, केएच-59टी, एएएसएम-हैमर लगी हैं। ब्रहमोस-एलजी एएलसीएम को लगाने की योजना है। इसमें ऐसे-ऐसे हथियार हैं कि तेजस हमला करे तो दुश्मन की हालत पस्त होनी तय है।
हथियारों की वैराइटी
एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम को लगाया जाएगा। फिलहाल इसमें एंटी-शिप मिसाइल केएच-35 और केएच-59एमके लगे हैं। अगर बम की बात करें तो इसमें चार तरह के बम लगाए जा सकते हैं। प्रेसिशन गाइडेड म्यूनिशन जैसे- स्पाइस, जेडीएएम, एचएसएलडी, डीआरडीओ ग्लाइड बाॅम्ब और डीआरडीओ एसएएडबल्यू। 
अत्याधुनिक बमों से लैस
लेजर गाइडेड बम जैसे केएबी-1500एल, जीबीयू-16 पैववे एल, सुदर्शन और ग्रिफिन एलजीबी। क्लस्टर म्यूनिशन जैसे आरबीके-500। अनगाइडेड बम जैसे ओडीएबी-500पीएम, जेडएबी-250/350, बेट एबी-500 एसएचपी, एफएबी-500टी, एफएबी-250, ओएफएबी-250-270, ओएफएबी-100-120 लगा सकते हैं।
 

You can share this post!

author

Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

Comments

Leave Comments