आज है विक्रम संवत् 2081 के आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि रात 08:43 बजे तक तदुपरांत त्रयोदशी तिथि प्रारंभ यानी बुधवार, 18 जुलाई 2024
चीन और पाकिस्तानी सेना का काल है यह हथियार...! भारत में बन रही फैक्ट्री

सेना

चीन और पाकिस्तानी सेना का काल है यह हथियार...! भारत में बन रही फैक्ट्री

सेना/थल सेना/Delhi/New Delhi :

स्वीडन की कंपनी साब भारत में एक महाविनाशक हथियार बनाने वाली है। कंपनी को रक्षा के क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद अब भारत में कार्ल गुस्ताफ एम-4 सिस्टम डवलप किया जाएगा। यह कंधे से दागा जाने वाला एक रॉकेट लॉन्चर है।

स्वीडन की प्रसिद्ध डिफेंस और एयरोस्पेस कंपनी साब ने भारत की रक्षा परियोजनाओं में 100 फीसदी के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी हासिल कर ली है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली यह पहली विदेशी फर्म है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह ऐतिहासिक निर्णय भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण क्षण है। साब एफएफवी इंडिया के नाम से एक नई कंपनी रजिस्टर्ड की गई है, जो कार्ल गुस्ताफ एम-4 सिस्टम के लेटेस्ट जेनरेशन वाले रॉकेट लॉन्चर के उत्पादन की देखरेख करेगी। 
बड़े-बड़े टैंकों का पलक झपकते खात्मा
भारत दो ऐसे देशों के बीच है, जो उसके कट्टर दुश्मन हैं। चीन और पाकिस्तान से हमेशा खतरा रहता है। यही देखते हुए भारत लगातार अपनी ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। कार्ल गुस्ताफ एम-4 एक ऐसा हथियार है, जिससे कई अलग-अलग तरह के गोले दागे जा सकते हैं। कार्ल गुस्ताफ एक छोटा रॉकेट लॉन्चर है, जो बड़े-बड़े टैंक का काल बन सकता है। कंधे पर रखकर इस हथियार को चलाया जाता है। इसे चलाने के लिए सिर्फ दो लोगों की जरूरत पड़ती है। एक सैनिक जो इसे कंधे से फायर करेगा और दूसरा जो इसमें गोला लोड करेगा।
बेहद छोटा है हथियार
यह हथियार दुश्मन की गाड़ी या टैंकों को एक गोले में ध्वस्त कर सकता है। कार्ल गुस्ताफ एम-4 से पहले इसके तीन वेरिएंट आ चुके थे, जिनमें एम-1, एम-2 और एम-3 शामिल है। एम-3 का प्रोडक्शन पहले से ही भारत की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में हो रहा है। इस हथियार का इस्तेमाल भारतीय सेना 1970 से ही कर रही है। इस हथियार की क्षमता की तुलना में बेहद कम यंत्रों को लेकर चलना पड़ता है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक इससे बिल्डिंग में छिपे दुश्मनों को भी मारा जा सकता है। यह हथियार यूक्रेन की ओर से भी इस्तेमाल किया जाता है, जिसने कई रूसी टैंकों को ध्वस्त किया है।
कितनी है ताकत
इस सिस्टम पर क्लिप-ऑन टेलीस्कोप लगा है। इसके अलावा लाल लेजर के जरिए भी निशाना लगाया जा सकता है। कार्ल गुस्ताफ के सभी वेरिएंट में 84 एमएम का गोला लगता है। इसका मतलब है कि गोला पुराने वर्जन में भी काम करेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक रुकी हुई गाड़ी पर 500 मीटर दूर और चलते वाहन पर 400 मीटर दूर से यह निशाना लगा सकती है। साब इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मैट पामबर्ग ने 100 फीसदी एफडीआई मंजूरी पाने वाली पहली कंपनी बनने पर गौरव व्यक्त किया। उन्होंने मेक इन इंडिया के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

You can share this post!

author

Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

Comments

Leave Comments