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विक्रांत तो मिल गया..! लेकिन ये दिल मांगे मोर..

सेना

विक्रांत तो मिल गया..! लेकिन ये दिल मांगे मोर..

सेना//Delhi/New Delhi :

20 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने करीब 45 हजार टन के स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत से समंदर में भारत की ताकत में बेतहाशा इजाफा होने वाला है। अगले साल के मध्य तक जब इस पर 30 फाइटर जेट और हेलिकॉप्टर तैनात हो जाएंगे, जब यह पूरी तरह कॉम्बैट-रेडी हो जाएगा,  तब भारत की नौसैनिक क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।
लेकिन क्या इतना ही काफी है या देश को एक और एयरक्राफ्ट कैरियर भी चाहिए..? विशेषज्ञों की मानें तो भारत को कम से कम 3 एयरक्राफ्ट कैरियर्स की जरूरत है। इसकी वजह ये है कि किसी भी वक्त देश के पास कम से कम दो एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशनल हालत में रहने चाहिए। इन्हें एक निश्चित अंतराल पर रीफिट और मैंटनेंस की जरूरत पड़ती है। जब कोई एक एयरक्राफ्ट कैरियर इस वजह से ऑपरेशनल न हो, तब दो जरूर ऑपरेशनल रहें। एक अरब सागर में तो दूसरा बंगाल की खाड़ी में। इसके लिए भारत को तेजी से काम करने की जरूरत है।
हिंद महासागर में चीन से खतरा
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन से लगातार खतरा बढ़ रहा है। वह पाकिस्तान के साथ मिलकर समंदर में भारत की घेरेबंदी में लगा है। 355 युद्धक जहाजों और सबमरींस के साथ चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी नेवी है। चीन बहुत तेजी से 2 और एयरक्राफ्ट कैरियर बना रहा है। उसके पास पहले से लियओनिंग और शैंडोंग नाम के दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। 80 हजार टन से ज्यादा के तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियन को दो महीने पहले ही लॉन्च किया। इस तरह वह दिन दूर नहीं जब हिंद महासागर क्षेत्र में चीन का कैरियर बैटल ग्रुप तैनात हो जाए। इस क्षेत्र में अब तक भारत को चीन पर बढ़त हासिल है लेकिन जल्द ही मामला उलटा हो सकता है।
अमेरिका का दबदबा
समंदर में ताकत की बात करें तो अमेरिका का कोई जवाब नहीं है। उसके पास परमाणु क्षमता से लैस एक लाख टन के 11 सुपर एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। हर एक पर 80 से 90 घातक लड़ाकू विमान तैनात हैं। ये कैरियर दुनिया के कोने-कोने में तैनात हैं। इराक युद्ध रहा हो या खाड़ी युद्ध या अफगानिस्तान में जंग अमेरिका के कैरियर बैटल ग्रुप्स की बेहद अहम भूमिका रही है।
तीसरे कैरियर से भारत को क्या मिलेगा
तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर के बनने से देश में रोजगार भी पैदा होंगे। आईएनएस विक्रांत में 76 प्रतिशत पुर्जे पूरी तरह स्वदेशी हैं। इसे बनाने में कम से कम 500 भारतीय कंपनियां और 100 लघु मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों का योगदान रहा है। इस क्रम में करीब 15 हजार लोगों को रोजगार मिला। हिंद महासागर में चीन को रोकने के लिए भारत को जल्द ही तीसरे और अब तक के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत है। इसके लिए 65 हजार टन के कैटोबार सिस्टम वाले कैरियर को बनाने की तैयारी चल रही है। उस पर 40 से 50 लड़ाकू विमान तैनात हो सकेंगे।

 

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Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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