प्रशंसनीय : भ्रष्टाचारियों के बीच ईमानदार बने रहने का क्या नायाब तरीका निकाला छत्तीसगढ़ के इस IFS अफसर ने

प्रशंसनीय : आलोक कटियार ने काम में पारदर्शिता लाने के लिए अपने दफ्तर के कमरे में कैमरा लगवा लिया

अजब-गजब

प्रशंसनीय : भ्रष्टाचारियों के बीच ईमानदार बने रहने का क्या नायाब तरीका निकाला छत्तीसगढ़ के इस IFS अफसर ने

अजब-गजब//Chhattisgarh/Raipur :

सरकारें भले ही बदल जाएं लेकिन अक्सर देखा गया है कि सरकारी तंत्र जस का तस रहता है। सरकारी दफ्तरों में काम कराने वाले को अच्छी तरह पता होता है कि बिना जेब ढीली किये बिना काम आगे नहीं सरकेगा,वही काम करने वाले को भी पता होता है कि ले के काम कर ही देंगे, भले ही देर  ही क्यों न करनी पड़े। सब तरफ  ऐसी व्यवस्था... ईमानदार का ईमानदार बने रहना एक कठिन काम  होता है। कई लोग भ्रष्टाचार की बहती गंगा से बच नहीं पाते और उस में हाथ धाेना शुरू कर देते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में एक ऐसा अधिकारी है जिसने अपने काम में पारदर्शिता लाने के लिए अपने दफ्तर के कमरे में कैमरा लगवा लिया है। जिसका स्क्रीन  रिसेप्शन और गैलरी में लगा है और उन्हें बाहर से  कोई भी यह देख सकता है कि अधिकारी बंद दरवाजों के पीछे क्या कर रहे हैं। है न ईमानदारी की मिसाल , या फिर इसे एक प्रशंसनीय पहल भी कह सकते हैं। 

इन अफसर का नाम आलोक कटियार है।1993 बैच के IFS में तीन प्रमुख पद हैं। वे क्रेडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं, इसके अलावा उनके पास जल जीवन मिशन के निदेशक और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के सीईओ का भी प्रभार है। उन्होंने अपने तीनों दफ्तरों में यह व्यवस्था की है। 

2015 में की थी इसकी शुरुवात 
आलोक कटियार बताते हैं कि यह व्यवस्था सबसे पहले 2015 में शुरू की गई थी। उस वक्त उन्हें प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) का सीईओ बनाया गया था। विभाग में भ्रष्टाचार की कई शिकायतें केंद्र तक पहुंची थीं। ऐसी दर्जनों शिकायतें आईं जब सड़क कहीं बनानी थी और दे दी गई कहीं और। इस वजह से केंद्र ने फंड रोक दिया था। कार्यालय में 200 ठेकेदार पंजीकृत थे।

ताकि हो पारदर्शिता से काम 
मेरे कमरे के बाहर रोज 60-70 ठेकेदार खड़े रहते थे। कमरे में घुसने के बाद लोगों को लगा कि मैं जानबूझकर उनसे नहीं मिल रहा हूं। तभी मेरे मन में विचार आया कि पूरे कार्यालय को सीसीटीवी से लैस किया जाये।  फिर मैंने अपने कमरे में भी एक कैमरा लगाने के बारे में सोचा ताकि लोग देख सकें कि मैं कमरे के अंदर क्या कर रहा हूँ। जब मैंने अपनी पत्नी और नौकरशाह मित्रों से इस बारे में पूछा तो सभी ने इनकार कर दिया। लेकिन, मैंने किसी की नहीं सुनी। 

लोगो की सोच बदली 
जब कैमरा लगाने आए तकनीशियन से मेरे कमरे में भी कैमरा लगाने को कहा गया तो उसने भी यह कहकर मना कर दिया कि ऐसा नहीं होता है सर। अधिकारी के कमरे तक देखने की सुविधा दी गई है। कमरे में कैमरा लगाने के बाद ठेकेदारों की सोच भी बदल गई।  विभाग में सुधार हुआ, केंद्र से फंड मिलने लगा। इसके बाद मैं जहां भी गया, यही व्यवस्था करता रहा। मैं क्रेडा और पीएमजीएसवाई में 5 वर्षों से पदस्थ हूं और वहां कई लाभ हैं। 

आलोक कटियार ने तकनीक को अपना हथियार बना लिया। अफसर के कमरे में कैमरा लगे रहने से कोई भी कुछ भी आरोप नही लगा सकता। रिश्वत देने की बात नहीं कर सकता। किसी की हिम्मत भी नहीं  ऐसे अफसर को घूस देने की या देने की कोशिश  की।आलोक कटियार ने कैमरे का उपयोग खुद को ईमानदार बनाए रखने के लिए किया है। यह वाकई में एक प्रशंसनीय पहल है। ऐसा करके वह र्ईमानदार लोगों को संदेश दे रहे हैं कि भ्र्ष्ट लोगों के बीच भी ईमानदार बने रहा जा सकता है। 

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author

सौम्या बी श्रीवास्तव

By News Thikhana

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