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ये कैसा महिला दिवस, दुष्टों ने साम्राज्ञी को सामग्री बना दिया गया..!

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ये कैसा महिला दिवस, दुष्टों ने साम्राज्ञी को सामग्री बना दिया गया..!

लेख//Madhya Pradesh/Indore :

नारायण, नारायण के जाप के साथ वीणा बजाते हुए नारदजी ने कैलाश पर्वत पर विराजमान शिवजी और माता पार्वती के श्रीचरणों में प्रणाम किया और बिना भूमिका के ही बोलना आरम्भ कर दिया I 
नारदजी - हे अर्द्धनारीश्वर शिवजी ! हे माते ! आपके भक्त नरेन्द्र मोदी ने नारी के सम्मान, समृद्धि और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अनेक कार्य आरम्भ किए हैं और सतत् अग्रसर है I महिलाओं के साथ होने वाले दुराचारों को रोकने के लिए घर-घर में शौचालयों का निर्माण, धुएं से मुक्ति के लिए उज्ज्वला योजना, घर-घर पानी, घर-घर बिजली, पक्के आवास I आर्थिक रूप से सशक्त तथा आत्मनिर्भर बनाने के लिए पांच करोड़ निर्धन महिलाओं को उनकी स्वयं की योग्यता के आधार पर लखपति बनाने की दिशा में तीव्र गति से काम कर रहे हैं I आठ मार्च तो विश्व महिला दिवस है, पूरे विश्व में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में चर्चाएं होंगी, विमर्श होंगे, आलेख प्रकाशित होंगे I 

भगवान शिवजी बोले- वत्स ! नारी सम्मान के साथ- साथ नरेन्द्र ने मेरे आराध्य भगवान श्रीराम मन्दिर के भव्य मन्दिर के निर्माण में जो अभूतपूर्व सहयोग दिया है, उस महान पराक्रम से मैं और पार्वती बहुत प्रसन्न हैं I 
माता ने मुस्काते हुए सहमति जताई और अचानक माता पार्वती अत्यन्त क्रोधित हो गईं और क्रोध से उनका  मुख काला पड़ गया तथा भौंहें टेढ़ी हो गयीं और वहां से विकरालमुखी काली प्रकट हुई, जो तलवार और पाश लिए हुए थी, चीते के चर्म की साड़ी पहने और नर मुण्डों की माला पहने हुए थी I वे अत्यन्त क्रोध में थी I 
उन्हें देखकर नारदजी भयभीत होकर त्राहिमाम कहते हुए दण्डवत् मुद्रा में आ गए और शिवजी को सहसा चण्ड और मुण्ड के वध की कथा याद आ गई, तब कालिका ने उन दोनों का वध किया था, वे मधुर स्वर में बोले, प्रिये ! शान्त हो जाओ I 
कालिका देवी ने शिवजी की ओर अत्यन्त क्रोध में देखा और फिर नारदजी को सम्बोधित करते हुए आवेश में बोली- नारद ! पूरे विश्व में साम्राज्ञी को सामग्री बनाकर नारी के सशक्तिकरण की आड़ में एक व्यापक नाटक किया जा रहा है I भारत ही नहीं पूरा विश्व ही अमेरिका-ब्रिटेन का अंधानुकरण और अनुसरण कर रहा है, जहां स्कूलों में गर्भपात की सुविधा होते हुए भी हर साल लाखों किशोरी कुंवारियां मां बन जाती हैं और उनकी तथा उनकी अवैध संतानों की दुर्दशा का वर्णन नहीं किया जा सकता है, जानना हो तो “एड्स प्रचार अभियान, यौन उद्योग की निर्लज्ज रणनीति” नामक पुस्तिका पढ़ लेना I 
वत्स नारद ! क्या सार्वजनिक रूप से शरीर का नग्न प्रदर्शन, मुक्त यौनाचार, दुराचार ही नारी सशक्तिकरण है? क्या पारिवारिकता की मुख्य धुरी नारी को “एकता” छाप टीवी धारावाहिक, पारिवारिक तथा सामाजिक विखण्डन की नायिका बनाने का षड्यंत्र बिना रोकटोक के नहीं चल रहा है? कहाँ है, शिवभक्त नरेन्द्र का सेन्सर बोर्ड? फिल्मों, धारावाहिकों और विविध विज्ञापनों में नारी शरीर को प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से एक सामग्री के रूप में दिखाया जाता है तो सरकारी एजेंसियां आखिर क्यों गांधी के तीन बन्दरों की भूमिका निभाने लगते हैं? संदेशखाली तो मात्र विशाल हिमखण्ड का एक शिखर मात्र है, कश्मीर, केरल, बंगाल, राजस्थान जैसे राज्यों में सनातनी नारियों का शोषण महापाप की पराकाष्ठा को पार कर चुका है I वोटों के लालच में राजनेताओं और उनके अनुयायी हिन्दुओं ने भी अपने मुंह को सिल लिया है और अन्तरात्मा को मार दिया है I एक नन के साथ बलात्कार करने वाले पादरी को अपराध सिद्ध होने के बाद भी बरी कर दिया जाता है, उल्टा शोषित नन को ही सामाजिक प्रताड़ना सहना पड़ी थी, उसे एक विधायक ने वेश्या तक कह डाला I रेप पर राजस्थान के एक मंत्री ने कहा था कि हमारा प्रदेश मर्दों का प्रदेश है I कई भ्रष्ट-दुष्ट नेता एवं अधिकारी रिश्वत के रूप में निर्भीकतापूर्वक नारी शरीर का नहीं नारी की आत्मा का भी दोहन-शोषण करते हैं I ये असहनीय है I  
माता ने बोलना जारी रखा – वत्स ! नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने दो नारे दिए थे, “एक या अनेक से मगर कण्डोम से” “चलो, कण्डोम के साथ”, ऐसे नारों की रचना करने वालों और उनका व्यापक प्रचार करने वालों को निर्दोष क्यों मान लिया गया? क्या इन नारों से ऐसा नहीं लगता है कि महिलाएं मात्र सेक्स की एक वस्तुभर है और भारत का हरेक पुरुष लम्पट है, क्या यही नारी सम्मान है? 
नारद- नहीं माते, कदापि नहीं I 
कालिका माता- वत्स ! जब समाज में खूंखार और भूखे भेड़ियें छद्मवेश में शिकार की तलाश में घूम रहे हों तब अर्द्धनग्न शरीर या फटे हुए वस्त्रों से झांकता शरीर नारी स्वतंत्रता नहीं कहलायेगा अपितु यह तो कामातुर भेड़ियों को शोषण के लिए उकसाने के लिए चारे का काम करेगा I वर्तमान में बिना उकसाए ही जब कामुक वयस्क-अवयस्क भेड़ियें दूध मुँही बच्चियों और अस्सी वर्ष की वृद्धा को भी नहीं छोड़ते हैं तो क्या वे अर्द्धनग्न नारी शरीर को अपनी वासना का शिकार बनाने से चुकेंगे? और जब अवयस्क दुराचारी अपराधी को सिलाई मशीन देकर सम्मानित किया जाएगा तो क्या नारी शोषण रुकेगा? 
माता ने बोलना जारी रखा- वत्स नारद ! नारी सशक्तिकरण और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के नाम पर किशोरियों-युवतियों को इतना भरमा दिया गया है कि वे अपने सपनों, संस्कारों, धर्म, मर्यादाओं, आत्मसम्मान, लक्ष्यों, कर्तव्यों, दायित्वों आदि को भूल चुकी हैं और यह भी भूल चुकी हैं कि वे साम्राज्ञी हैं, सामग्री नहीं I सनातन संस्कृति के शत्रुओं ने येन, केन, प्रकारेण उनको यह समझा दिया है कि शरीर का चरित्र और व्यक्तित्व के सम्मान का कोई सम्बन्ध नहीं है और शरीर तो भोगने के लिए ही हैं, यौन सम्बन्ध मात्र त्वचा का सम्बन्ध है I बलात्कार को बच्चों द्वारा की गई, छोटी-सी गलती कहकर एक अलग तरह का सन्देश नारी के शोषण को उकसाने के लिए किया गया ताकि समाज में बलात्कार एक सामान्य प्रक्रिया के रूप में स्वीकार्य हो जाए और नारी भी बलात्कार की शिकायतें करने से परहेज करने लगें I एक नेत्री निर्लज्जता से कहती है कि रेप तो होते ही रहते हैं, आम बात है I नारद ! एक कथित भारतीय नारी ने कहा था कि जब बलात्कार हो ही रहा हो तब बलात्कार का शिकार लड़कियों को सेक्स का मजा लेना चाहिए I ऐसे दुष्टों को समाज छोड़ देता है, यह सहनशीलता की नहीं कायरता की पराकाष्ठा है I  
नारदजी – माते ! आप सत्य ही कह रही हैं I 
कालिकाजी- वत्स ! किशोरियां तथा युवतियां पारिवारिक समारोहों, बाजारों और मन्दिरों तक में शालीन वस्त्रों से परहेज करने लगी हैं, ऐसा किया जाना वर्तमान परिस्थितियों में दुराचार को आमन्त्रित करने जैसा है I इस पर गम्भीरता से विचार किया जाना चाहिए I पढाई के लिए माता-पिता से दूर रहने वाली लड़कियों को जिसतरह से नशे के दलदल और फिर शारीरिक शोषण के दल-दल में फंसाया जा रहा है, इन स्थितियों को किन्हीं भी स्थितियों में रोकना ही होगा I अन्यथा अनर्थ हो जाएगा, अविवाहित माताओं का कलंक भारत को भी ढोना पड़ेगा या गर्भपात के पाप के बोध का बोझ लड़कियों के मन-मस्तिष्क को आजीवन सालता रहेगा I विवाहपूर्व वर-वधु का जिस तरह मिलाप हो रहा है, क्या विवाह की वेदी पर देवताओं की उपस्थिति में एक दूसरे के प्रति प्रथम समर्पण के वचनों का क्या औचित्य है, क्या यह देवी-देवताओं का अपमान नहीं है? 
नारद- जी माते ! यह तो अग्निदेव सहित सभी आमन्त्रित देवी-देवताओं का घोर अपमान ही है I
कालिका माता- वत्स ! तुमने नारी को आत्मनिर्भर बनाने के नरेन्द्र के प्रयासों का उल्लेख किया है, परन्तु अहिल्या बाई, रानी लक्ष्मीबाई, दुर्गावती के देश में नारी शक्ति का घनघोर अपमान करते हुए उन्हें एक हजार, दो हजार और दस हजार देने का लालच देकर उनके भीतर की कर्मशीलता को धिक्कारते हुए, उनमें दीनता का भाव रोपा जा रहा है और लाखों महिलाएं अपने स्वाभिमान को भूल कर उस धन को पाने के लिए ललचाने लगी हैं I नारद ! नरेन्द्र से कहना कि इस नारीत्व-विरोधी षड्यंत्र को बरबस रोकें, अन्यथा नारी की व्यक्तिसत्ता, उसका सम्मान, उसकी इंडिविजुअलिटी और उसके भीतर की अनन्त सम्भावनाएं समाप्त हो जाएगी, और वह मातृशक्ति के पराभव का कारण बनेगा I    
इतना कहकर अचानक कालिका माता पुनः माता पार्वती के शरीर में समा गई I 
फिर माता पार्वती ने शान्त स्वर में बोला- वत्स नारद ! नारी की दुर्दशा देखकर मेरे मन-मस्तिष्क में जो भयावह क्रोध उत्पन्न हुआ था, वही कालिका के रूप में प्रकट हुआ था I जिस देश में नारी के बिना यज्ञ नहीं हो सकता हो, जहां ये श्लोक लोकजीवन में व्याप्त हों, वहां नारी को उसके स्वयं की दिव्यता का बोध कराना ही होगा I यथा, यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः । यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।। अर्थात् जहाँ स्त्रियों की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ स्त्रियों की पूजा नही होती है, उनका सम्मान नही होता है, वहाँ किये गये समस्त अच्छे कर्म निष्फल हो जाते हैं I शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम् । न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा ।। जिस कुल में स्त्रियाँ कष्ट भोगती हैं ,वह कुल शीघ्र ही नष्ट हो जाता है और जहाँ स्त्रियाँ प्रसन्न रहती है वह कुल सदैव फलता फूलता और समृद्ध रहता है I पुत्र नारद ! स्त्री साक्षात अग्निदेव की पुत्री है, इसीलिए उसे रसोईघर में अच्छा लगता है, भोजन बनाने में संतुष्टि की अनुभूति होती है I रसोईघर ही पारिवारिक संस्कारों की राजधानी है, जननी है I 
तुम मेरी ओर से शिवजी के परम भक्त नरेन्द्र को सन्देश देना कि जैसे भी हो भारतीय ही नहीं विश्व की प्रत्येक नारी की अस्मिता की रक्षा करने का पराक्रम करें, मेरा और शिवजी का आशीर्वाद सदैव नरेन्द्र के साथ है I 
नारदजी ने अत्यन्त ही प्रसन्नता के साथ शिवजी और पार्वतीजी को प्रणाम करते हुए, उनके  संदेशवाहक के रूप में भारतभूमि की तरफ प्रयाण किया I
 

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डॉ मनोहर भंडारी

By News Thikhana

डॉ. मनोहर भंडारी ने शासकीय मेडिकल कॉलेज, इन्दौर में लंबे समय तक अध्यापन कार्य किया है। वे चिकित्सा के अलावा भी विभिन्न विषयों पर निरंतर लिखते रहते है।

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