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आर या पार... पीएम मोदी के ‘मिशन 370’ के लिए बड़ी चुनौती कौन?

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आर या पार... पीएम मोदी के ‘मिशन 370’ के लिए बड़ी चुनौती कौन?

राजनीति//Delhi/New Delhi :

भाजपा इस चुनाव में 370 सीटें जीत लेती है, तो 1984 में राजीव गांधी और 1957 में जवाहरलाल नेहरू के बाद ऐसी प्रचंड जीत हासिल करने वाले मोदी तीसरे प्रधानमंत्री होंगे। हालांकि, 370 सीटों पर जीत का लक्ष्य वाकई एक बड़ी चुनौती है। ये चुनौती दक्षिण भारत में भी है और उत्तर भारत में भी।

लोकसभा चुनाव 2024 में ज्यादा से ज्यादा तीन महीने बाकी हैं। बीजेपी चुनाव को लेकर जोर-शोर से तैयारी कर रही है। दूसरी ओर एनडीए को हराने के मकसद से बने विपक्षी दलों के इंडि अलायंस को एक के बाद एक झटके मिल रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ही लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा का टारगेट सेट कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि इस बार चुनाव बीजेपी कम से कम 370 सीटें जीतेगी। वहीं, सहयोगी दलों के साथ भाजपा 400 के पार पहुंच जाएगी। 
लोकसभा में सोमवार को पीएम मोदी ने कहा- अब हमारी सरकार का तीसरा कार्यकाल भी दूर नहीं है। अबकी बार... और बीजेपी सांसदों ने एक सुर में कहा-400 पार। पीएम मोदी के ‘अबकी बार’ पर बीजेपी सांसदों का 400 पार वाला शंखनाद सदन में गूंजता रहा। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं ऐसे आंकड़ों में नहीं पड़ता। लेकिन मैं देख रहा हूं कि देश का मिजाज भाजपा को 400 सीटें पार करवाकर रहेगा। लेकिन बीजेपी को 370 सीट जरूर देगा।’
ये बयान देकर पीएम मोदी ने सीटों की लक्ष्मणरेखा खींच दी। बीजेपी के लिए 370 सीटों की गारंटी देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की याद दिला दी। 2019 में सरकार बनने के तीसरे महीने में ही जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया गया, जो भाजपा का बहुत पुराना वादा था।
अब कश्मीर में आर्टिकल 370 को खत्म करने वाले पीएम मोदी बीजेपी के लिए आम चुनाव में 370 सीटें मांग रहे हैं। पीएम मोदी को यकीन है कि 370 सीटें तो बीजेपी को पक्का मिलेंगी। आखिर इस आत्मविश्वास की वजह क्या है? जनता को ‘मोदी की गारंटी’ देने वाले पीएम किस बात से इतने कॉन्फिडेंट हैं कि जनता उनको 370 सीटों की गारंटी दे रही है। 
पीएम मोदी को क्यों है 370 सीटों का यकीन?
-देश में 80 करोड़ लोगों को भोजन देने से लेकर गैस सिलिंडर और शौचालय जैसी चीजों ने आम लोगों को सरकार से जोड़ा। पीएम मोदी को इस बात पर भरोसा है कि जनता अपनी बेहतर जिंदगी की गारंटी उनको ही मानती है।
-पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनावों में उत्तर भारत के तीन राज्यों में मिली शानदार जीत ने भी पीएम मोदी का भरोसा बढ़ाया है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बन गई, जहां लोकसभा की 65 सीटें पड़ती हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इन तीन राज्यों में 61 सीटें जीती थीं। वो जीत तब मिली थी, जबकि तीनों राज्यों में विधानसभा चुनावों में बीजेपी हार गई थी। 
- एक साल के भीतर विपक्ष की एकता अपनी धुरी से बिखर गई। इंडि अलायंस का सबसे खास घटक जेडीयू अब बीजेपी के साथ है। नीतीश कुमार का फिर से बीजेपी के साथ जाना, उद्धव ठाकरे का कांग्रेस को आंखें दिखाना, ममता का बात बात पर रूठ जाना... इससे यही साबित होता है कि विपक्ष में कितना बिखराव है।
- राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के सामने विकल्प के रूप में कांग्रेस को होना चाहिए, लेकिन कांग्रेस में दिशाहीनता की स्थिति दिखती है। ना वो सहयोगियों को साथ रख पाई, ना उसके नेताओं में एकजुटता नजर आई। राहुल गांधी जरूर ‘न्याय यात्रा’ पर निकले हैं, लेकिन पीएम मोदी को यकीन है कि इस यात्रा से कुछ होने वाला है नहीं। लोकसभा में सोमवार को अपने संबोधन में पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर तंज कसे थे। उन्होंने कहा, ‘एक ही प्रोडक्ट बार-बार लॉन्च करने के चक्कर में कांग्रेस की दुकान पर ताला लगने की नौबत आ गई है’।
- 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से बदले माहौल में बीजेपी को लगता है कि राम मंदिर का निर्माण उसके लिए अगली बार सत्ता का निर्माण करेगा।
370 सीटों का लक्ष्य- चुनौती भी, संभावनाएं भी
अगर भाजपा इस चुनाव में 370 सीटें जीत लेती है, तो 1984 में राजीव गांधी और 1957 में जवाहरलाल नेहरू के बाद ऐसी प्रचंड जीत हासिल करने वाले मोदी तीसरे प्रधानमंत्री होंगे। हालांकि, 370 सीटों पर जीत का लक्ष्य वाकई एक बड़ी चुनौती है। पिछली बार भाजपा ने 303 सीटें जीती थीं। तब उसने उत्तर भारत में विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था।
उत्तर भारत के 10 हिंदी भाषी राज्यों में भाजपा ने जीतीं 177 सीटें 
उत्तर भारत के 10 हिंदी भाषी राज्यों में कुल 225 लोकसभा सीटें आती हैं। इनमें भाजपा ने 177 सीटें जीती थी। प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात में भाजपा ने 26 में से 26 सीटें जीती। महाराष्ट्र की 48 सीटों में भाजपा को 23 सीटें मिलीं। बीजेपी के लिए दुर्गम माने जाने वाले राज्यों में देखें, तो पश्चिम बंगाल में 42 में 18 सीटें, ओडिशा की 21 में 8 सीटें, असम के 14 में 9 सीटें, तेलंगाना के 17 में 4 सीटें और कर्नाटक की 28 में 25 सीटें जीत ली थी। 290 सीटें ऐसे ही आ गई। बाकी राज्यों में 1 या 2 सीटों को मिलाकर भाजपा का आंकड़ा 303 हो गया था। 
2019 के चुनाव में उत्तर भारत में भाजपा का परफॉर्मेंस
- हिंदी पट्टी में भाजपा ने 225 सीटों में से 177 पर जीत हासिल की। 
- गुजरात में भाजपा ने सभी 26 सीटों पर जीत हासिल की।
- महाराष्ट्र की 48 सीटों में भाजपा ने 23 सीटों पर कमल खिलाया।
- पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से भाजपा को 18 सीटें मिली।
- ओडिशा की 21 सीटों में से भाजपा के खाते में 8 सीटें गईं।
- असम की 14 लोकसभा सीटों में से 9 सीटें पार्टी को मिली।
- तेलंगाना की 17 सीटों में से 4 सीटों पर भगवा पार्टी को जीत मिली।
- कर्नाटक की 28 सीटों में से 25 सीटें भाजपा के पास गईं।

पीएम मोदी ने अब अपनी ही खींची विजय रेखा को बड़ा बनाने की चुनौती भाजपा के सामने रख दी है। पीएम मोदी ने खुद को व्ठब् बताकर देश की 54 फीसदी आबादी पर भी हाथ रखने की कोशिश की, लेकिन जवाब में राहुल गांधी जातिगत जनगणना पर अड़े हुए हैं।
भाजपा को नए क्षेत्र तलाशने होंगे
इस राजनीतिक आरोपों-प्रत्योरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि भाजपा कैसे 303 में 67 सीटें जोड़कर इसे 370 तक पहुंचाएगी? जाहिर है कि इसके लिए भाजपा को नए क्षेत्र तलाशने होंगे, जो बहुत आसान नहीं है।
- उत्तर प्रदेश में भाजपा को 80 में 62 सीटें मिली थी। 400 पार जाने के लिए यहां पार्टी को कम से कम 10 सीटें बढ़ानी होगी।
- उसी तरह महाराष्ट्र में पिछली बार मिली 48 में 23 की जीत को 30 तक बढ़ाना होगा, यानी 7 सीटें बढ़ानी होंगी।
- पश्चिम बंगाल की जीत को 18 से 30 करनी होगी।
- मध्य प्रदेश, राजस्थान में जिन एक एक सीटों को भाजपा हार गई थी, उसे भी जीतना होगा। 
- उसी तरह छत्तीसगढ़ में हारी दोनों सीटें भी भाजपा को जीतनी होगी।
दक्षिण भारत में सुधारना होगा परफॉर्मेंस
दक्षिण की तरफ बढ़ें तो आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे अहम राज्यों में भाजपा की जीत को जीरो से 10-10 पर ले जाना होगा। तेलंगाना में 4 वाली जीत को 8 पर तो कर्नाटक में पुरानी जीत को कायम रखना होगा। अगर ऐसा हुआ, तो भाजपा 370 के पार अपने दम पर पहुंच जाएगी। 
भाजपा के सामने 2 अहम चुनौतियां
पीएम मोदी के इस टारगेट और भाजपा के कॉन्फिडेंस पर विपक्ष कह रहा है कि ये मुंगेरीलाल के हसीन सपने हैं। लेकिन बीजेपी के सामने दो अहम चुनौतियां हैं-
चुनौती नंबर 1- उत्तर भारत की पिछली जीत को हर हाल में बरकरार रखना।
चुनौती नंबर 2- दक्षिण भारत के कई राज्यों में मिले जीरो को शानदार सफलता में बदलना।

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author

Jyoti Bala

By News Thikhana

Senior Sub Editor

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